November 4, 2026

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Scam Tender Rates Details 2026: नगर निगम की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में, अलग-अलग टेंडर में पाइप की दरों में मिला दुगुना अंतर

राजधानी भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के दौरान शहर के सौंदर्यीकरण और सुंदरता को बढ़ाने के उद्देश्य से लगाए गए फाउंटेन की खरीदी प्रक्रिया पर भोपाल नगर निगम (BMC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लगभग 1.73 करोड़ रुपये के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में खरीदे गए उपकरणों की अत्यधिक दरों, उनकी गुणवत्ता और वास्तविक रूप से मौके पर उनकी उपलब्धता को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है।

📈 टेंडर में दरों की असमानता: पीवीसी पाइप से लेकर मोटर की कीमतों में भारी उछाल

फाउंटेन खरीदी में दरों का अनियमित गणित:

  • मोटर की खरीदी दरें: नगर निगम प्रशासन द्वारा 7.5 हॉर्स पावर (HP) की मोटर 45,000 रुपये में, जबकि 10 एचपी की मोटर 58,500 रुपये की ऊंची दरों पर खरीदी गई।
  • पाइप की दरों में दोहरा मापदंड: उपकरणों के टेंडर में बड़ी विसंगति देखने को मिली है। एक टेंडर में जिस पीवीसी (PVC) पाइप की कीमत 11,500 रुपये दर्ज की गई, वहीं दूसरे टेंडर में उसी पाइप की खरीदी 25,000 रुपये में दिखाई गई है।
💡 13,600 रुपये प्रति नग की दर से खरीदी गई 27 वाट की LED लाइट; नोजल और हेडर के दामों ने भी चौंकाया

अत्यधिक महंगी दरों पर खरीदे गए उपकरण:

  • जीआई हेडर व फोम जेट नोजल: 10 एचपी क्षमता वाले फाउंटेन के लिए जीआई (GI) हेडर की कीमत 82,000 रुपये रखी गई, जबकि 25 एमएम के फोम जेट नोजल की दर 12,500 रुपये प्रति नग तय की गई।
  • अंडरवाटर एलईडी लाइट्स: फाउंटेन को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाने के लिए उपयोग की जाने वाली 27 वाट की आरजीबी (RGB) अंडरवाटर एलईडी लाइट को 13,600 रुपये प्रति नग की भारी-भरकम दर पर खरीदा गया।
🔍 प्रशासनिक जांच की उठ रही मांग; ठेकेदारों और अधिकारियों के सिंडिकेट पर उठे सवाल

निगम की साख पर उठे सवाल और आगे की स्थिति:

  • गुणवत्ता और सत्यापन: जानकारों का कहना है कि बाजार दर की तुलना में कई गुना अधिक कीमत पर की गई इस खरीदी में न केवल सरकारी धन की बर्बादी हुई है, बल्कि मौके पर फाउंटेन के उपकरणों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) भी संदिग्ध है।
  • जांच की मांग: शहर के पार्षदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 1.73 करोड़ रुपये के इस पूरे ब्यूटीफिकेशन प्रोजेक्ट की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
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