आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने छात्रों के लिए पढ़ाई और असाइनमेंट पूरा करने की प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है। भारत सहित दुनियाभर के छात्र अपने दैनिक अध्ययन और होमवर्क में AI टूल्स का खुलकर इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, इसके दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर शिक्षा जगत में बहस जारी है। इसी बीच वर्ल्ड बैंक की ‘वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026’ में प्रकाशित एक हालिया रिसर्च ने चिंताजनक आंकड़े सामने रखे हैं। स्टडी के अनुसार, AI का उपयोग छात्रों को गृहकार्य में तो मदद कर रहा है, लेकिन मुख्य परीक्षाओं में उनके प्रदर्शन को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है।
📈 80% छात्र कर रहे हैं पढ़ाई में AI का उपयोग: चीन में 7वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों पर की गई रिसर्च
वर्ल्ड बैंक द्वारा यह रिसर्च चीन में 7वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के बीच आयोजित की गई। आंकड़े दर्शाते हैं कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच पढ़ाई के लिए पहली बार AI का इस्तेमाल करने वाले छात्रों का अनुपात शून्य से बढ़कर 80 फीसदी तक पहुंच गया। अध्ययन में पाया गया कि AI की मदद से छात्रों के होमवर्क स्कोर में औसतन 18 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, जब बात बिना किसी डिजिटल मदद के क्लास में होने वाले परीक्षणों और परीक्षाओं की आई, तो नतीजों में बड़ा फेरबदल देखने को मिला।
📉 होमवर्क स्कोर 18% बढ़ा, लेकिन परीक्षा के अंकों में 20% तक की भारी गिरावट
रिपोर्ट के मुताबिक, नियमित रूप से AI का सहारा लेने वाले छात्रों का मासिक क्लास टेस्ट स्कोर 20 प्रतिशत तक गिर गया। वहीं, जिन विद्यार्थियों ने अपने अध्ययन में AI का प्रयोग किया था, उनके कॉलेज प्रवेश परीक्षा (Entrance Exam) के औसत प्राप्तांक भी 5% से 7% तक कम रहे। लंबे समय तक AI पर निर्भर रहने वाले छात्रों के प्रदर्शन पर इसका नकारात्मक असर और अधिक गहराता चला गया। शोधकर्ताओं का मानना है कि छात्र AI की मदद से असाइनमेंट तो जल्दी पूरा कर लेते हैं, लेकिन वे विषय की मौलिक समझ, ज्ञान और समस्या-समाधान (Problem-Solving) कौशल विकसित करने में पीछे छूट रहे हैं।
⏳ समय की दोहरी खपत: AI टूल्स के बावजूद पढ़ाई का कुल समय बढ़ा
अध्ययन में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि AI का उपयोग करने के बावजूद छात्रों का समय कम होने के बजाय दोगुना खर्च हो रहा है। शोध के अनुसार, छात्रों ने जितना समय AI के जरिए उत्तर ढूंढने और होमवर्क पूरा करने में लगाया, उतना ही समय उन्हें बाद में विषयों को समझने में अलग से देना पड़ा। इसके बावजूद, परीक्षा कक्ष में बिना AI सहायता के उनका प्रदर्शन प्रभावित हुआ। यह रिपोर्ट संकेत देती है कि केवल उत्तर प्राप्त करने के बजाय मौलिक सीख और अभ्यास ही बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन की असली कुंजी है।

More Stories
IT Career Guide 2026: 12वीं के बाद कंप्यूटर साइंस में बनाएं भविष्य, जानिए किस कोर्स में है सबसे ज्यादा स्कोप
UPSSSC PET 2026 City Intimation Slip: आयोग ने जारी की एग्जाम सिटी पर्ची, जानें एडमिट कार्ड से जुड़ी जरूरी बातें
Teacher Training Program: गूगल के साथ मिलकर NCERT सिखाएगा AI और डिजिटल टूल्स, 12 से 15 अक्टूबर तक चलेगी ऑनलाइन ट्रेनिंग