जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने दो आईएएस (IAS) अधिकारियों के खिलाफ जारी गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट को निरस्त कर दिया है। अदालत के पूर्व आदेश का पालन नहीं किए जाने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने ये वारंट जारी किए थे। सुनवाई के दौरान जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ को अवगत कराया गया कि, “पूर्व में पारित आदेश का परिपालन कर दिया गया है।” इसके साथ ही दोनों अधिकारियों के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को निरस्त करने संबंधी आवेदन भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
⏳ समय सीमा बीतने के बाद भी नहीं हुआ था आदेश का पालन: सेक्शन ऑफिसर ने दायर की थी अवमानना याचिका
मामला सागर कलेक्टर कार्यालय में कार्यरत सेक्शन ऑफिसर शीला सेन के नियमितीकरण से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने नियमितीकरण की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने 19 मार्च 2025 को याचिका का निराकरण करते हुए राज्य सरकार और सागर कलेक्टर को निर्देशित किया था कि याचिकाकर्ता के दावों का 90 दिनों के भीतर निराकरण किया जाए। निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी जब आदेश का पालन नहीं हुआ, तो शीला सेन ने हाई कोर्ट में अवमानना याचिका (Contempt Petition) दायर कर दी।
🏛️ अवमानना पर हाई कोर्ट का कड़ा रुख: तत्कालीन प्रमुख सचिव और सागर कलेक्टर को किया गया था तलब
एकलपीठ ने पिछली सुनवाई के दौरान पाया था कि सागर कलेक्टर ने 3 दिसंबर 2025 को रजिस्ट्री को पत्र भेजकर तहसीलदार को संपर्क अधिकारी नियुक्त किए जाने की सूचना तो दी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से परिपालन रिपोर्ट (Compliance Report) प्रस्तुत नहीं की गई।
अदालत ने इस स्थिति को प्रशासनिक व्यवस्था की दयनीय स्थिति करार देते हुए तत्कालीन प्रमुख सचिव (राजस्व) विवेक पोरवाल और तत्कालीन सागर कलेक्टर संदीप जीआर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर उन्हें 21 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए थे।
👮 सरकार ने कोर्ट में दी आदेश पालन की रिपोर्ट: हाई कोर्ट ने वापस लिया गैर-जमानती वारंट
वारंट की तामील की जिम्मेदारी भोपाल पुलिस कमिश्नर और सागर पुलिस अधीक्षक (SP) को सौंपी गई थी।
याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एकलपीठ के समक्ष गैर-जमानती वारंट निरस्त करने का आवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि आदेश का परिपालन पूर्ण कर लिया गया है। दलीलों को सुनने और अनुपालन रिपोर्ट देखने के बाद एकलपीठ ने दोनों आईएएस अधिकारियों के वारंट को निरस्त कर दिया।
🚨 पन्ना कलेक्टर उषा परमार के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी: 30 सितंबर को कोर्ट में पेश होने के निर्देश
वहीं, एक अन्य अवमानना मामले की सुनवाई करते हुए जबलपुर हाई कोर्ट ने पन्ना कलेक्टर उषा परमार के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है।
जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने पन्ना कलेक्टर को आगामी 30 सितंबर को अनिवार्य रूप से न्यायालय में हाजिर होने के आदेश दिए हैं और वारंट की तामील कराने की जिम्मेदारी एसपी पन्ना को सौंपी है। यह आदेश सेवानिवृत्त कर्मचारी जाविन आरा रिज़वी की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया।
📄 सेवानिवृत्त कर्मचारी के नियमितीकरण में देरी पर कार्रवाई: कोर्ट के नोटिस को किया था नजरअंदाज
याचिकाकर्ता जाविन आरा रिज़वी कलेक्टर कार्यालय में सेक्शन ऑफिसर के रूप में कार्यरत थीं।
नियमितीकरण की मांग पर हाई कोर्ट ने 13 अगस्त 2025 को याचिका का निपटारा करते हुए 90 दिनों में अभ्यावेदन पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। आदेश का अनुपालन न होने पर दायर अवमानना याचिका पर कोर्ट ने 4 दिसंबर 2025 को नोटिस जारी किया था। इसके बावजूद पन्ना कलेक्टर की ओर से न तो कोई अधिवक्ता उपस्थित हुआ और न ही अनुपालन रिपोर्ट जमा की गई, जिसके बाद हाई कोर्ट ने यह सख्त कदम उठाया।

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