September 21, 2026

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MP Teacher Recruitment Case: 1.31 लाख पद खाली फिर भी भर्ती नाममात्र! मध्य प्रदेश में शिक्षक अभ्यर्थियों का अनशन

भोपाल। राजधानी भोपाल में बीती 20 सितंबर को 45 वर्ष की आयु पूरी करने के साथ ही रेखा पाल मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों के लिए तय महिला आयुसीमा से बाहर (Overage) हो गईं।

ग्रेजुएशन के बाद से शिक्षक बनने की आस संजोए रेखा वर्ष 2011 से लगातार शिक्षक भर्ती की परीक्षाएं दे रही थीं। मध्य प्रदेश के मिडिल स्कूलों में इस समय माध्यमिक शिक्षकों (वर्ग 2) के 99,197 पद खाली पड़े हैं, वहीं प्राइमरी स्कूलों में प्राथमिक शिक्षकों (वर्ग 3) के खाली पदों का आंकड़ा 1,31,000 के पार पहुंच चुका है। इसके बावजूद विज्ञापित वैकेंसी की संख्या इतनी कम है कि 99.76 पर्सेंटाइल हासिल करने वाले मेधावी अभ्यर्थी भी स्थायी नियुक्ति पाने से चूक रहे हैं।

⛺ फुटपाथ पर खाना और पन्नी के नीचे रात: 32 दिनों से अनशन पर बैठे हैं विदिशा और भिंड के अभ्यर्थी

लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के बंद मुख्य द्वार के बाहर फुटपाथ पर एक तिरपाल/पन्नी की आड़ में प्रदेशभर से आए अभ्यर्थी पिछले 32 दिनों से कड़ाके की धूप और बारिश के बीच अनशन पर डटे हुए हैं।

विदिशा के रहने वाले यशपाल बताते हैं कि वे 2011 से संविदा शिक्षक भर्ती की परीक्षाएं दे रहे हैं। कभी डेढ़ तो कभी दो नंबर से उनका चयन रुकता रहा। हालिया शिक्षक भर्ती वर्ग 2 की परीक्षा में उनके 98.4 पर्सेंटाइल आए, लेकिन सामान्य वर्ग के लिए विज्ञापित पद इतने कम थे कि 77 हजार अभ्यर्थियों में से मात्र 0.1 प्रतिशत का ही चयन संभव हो सका। शिवपुरी से आए एससी वर्ग के अभ्यर्थी मलखान सिंह जाटव के 98.92 पर्सेंटाइल आने के बाद भी केवल 18 पद होने से चयन नहीं हुआ। वहीं भिंड के विनीत को पता चला कि विज्ञान विषय में मात्र 7 पद हैं, जिससे उन्होंने परीक्षा ही छोड़ दी।

📉 1.31 लाख पद खाली, लेकिन भर्ती केवल 6,800 पदों पर: अभ्यर्थियों का आरोप- भविष्य से हो रहा खिलवाड़

शिक्षक भर्ती वर्ग 3 के अभ्यर्थी ईशान श्रीवास्तव का कहना है कि 98 से 99 पर्सेंटाइल अंक लाने वाले अभ्यर्थियों को भी रोजगार न मिल पाना प्रदेश की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है।

मध्य प्रदेश शासन के राजपत्र (Gazette) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्राथमिक शिक्षकों (वर्ग 3) के 1,31,157 पद खाली हैं। इसके विपरीत सरकार ने केवल 13,000 पदों पर भर्ती निकाली और उसमें से भी मात्र 6,871 पदों पर ही अंतिम नियुक्तियां दी गईं। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह न केवल उनके साथ अन्याय है, बल्कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों मासूम बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है।

📢 चयनित शिक्षकों की प्रमुख मांगें: पदवृद्धि और स्वीकृत बजट के समायोजन की गुहार

32 दिनों से डीपीआई के बाहर धरना दे रहे चयनित अभ्यर्थियों ने सरकार से निम्नलिखित न्यायसंगत मांगें रखी हैं:

  • माध्यमिक व प्राथमिक शिक्षक पदों में वृद्धि: शिक्षक भर्ती वर्ग 2 और वर्ग 3 के रिक्त पदों की संख्या में तत्काल सम्मानजनक वृद्धि की जाए।
  • पूर्व पात्रता के आधार पर पदवृद्धि: वर्ष 2018 और 2022 की पात्रता परीक्षाओं के आधार पर रिक्त पदों पर अभ्यर्थियों का समायोजन हो।
  • बजट समायोजन: चालू बजट सत्र में 15 हजार शिक्षक पदों के लिए स्वीकृत बजट का उपयोग पदवृद्धि के साथ त्वरित नियुक्तियों में किया जाए।
  • विषयवार पदवृद्धि (वर्ग 2): शिक्षक भर्ती वर्ग 2 के प्रत्येक मुख्य विषय में कम से कम 3-3 हजार पदों का इजाफा किया जाए।
  • प्राथमिक शिक्षक पदवृद्धि (वर्ग 3): वर्ग 3 में कम से कम 25 हजार नए पदों की वृद्धि कर मेरिट लिस्ट के अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए।
🏫 1,800 से अधिक स्कूल पूरी तरह शिक्षक विहीन: एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हजारों विद्यालय

एक तरफ जहां 98-99% अंक लाने वाले प्रशिक्षित बी.एड./डी.एल.एड. अभ्यर्थी सड़कों पर अपनी मांगों को लेकर भूखे-प्यासे बैठे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था जर्जर हाल में है।

शासकीय आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश के 1,895 स्कूलों में एक भी नियमित या परमानेंट शिक्षक पदस्थ नहीं है। इसके अलावा 1,968 स्कूल ऐसे हैं, जो महज एक अकेले शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, उनका आंदोलन निरंतर जारी रहेगा।

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