September 21, 2026

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Madhya Pradesh News: श्यामा और रामा तुलसी से अलग है वन तुलसी! जानें इसके औषधीय गुण और ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर

शहडोल। आयुर्वेद में तुलसी का विशेष महत्व हमेशा से रहा है, लेकिन इन दिनों मध्य प्रदेश के शहडोल अंचल में जंगलों में पाई जाने वाली ‘वन तुलसी’ की मांग तेजी से बढ़ रही है। आयुर्वेदिक दवाएं बनाने वाली बड़ी कंपनियों और जड़ी-बूटी व्यापारियों की ओर से ग्रामीण इलाकों में वन तुलसी की भारी डिमांड की जा रही है। व्यापारी अब ग्रामीणों और किसानों को वन तुलसी का ज्यादा से ज्यादा संग्रहण करने और पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। औषधीय गुणों से भरपूर इस पौधे ने शहडोल के ट्राइबल बेल्ट के ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय और स्वरोजगार का एक बेहतरीन अवसर प्रदान किया है।

🍃 श्यामा और रामा तुलसी से अलग है वन तुलसी: जंगलों में संरक्षण की पड़ रही आवश्यकता

चाय में तुलसी की पत्तियां डालकर पीना बेहद सामान्य है और हिंदू धर्म में लगभग हर घर में रामा या श्यामा तुलसी का पौधा मिल जाता है। हालांकि, जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली वन तुलसी इनसे काफी अलग और असरदार मानी जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वन तुलसी में औषधीय तत्व अधिक प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे इससे बनने वाली दवाएं अत्यंत कारगर होती हैं। समय के साथ जंगलों में इसकी उपलब्धता कम होने के कारण अब इसके संरक्षण और योजनाबद्ध खेती की जरूरत महसूस की जा रही है। बाजार में मिल रहे अच्छे दामों ने इसे ग्रामीणों के बीच आकर्षण का केंद्र बना दिया है।

📈 ₹80 प्रति किलो तक बिक रही हैं पत्तियां: 100 टन वन तुलसी का मिला है बड़ा ऑर्डर

शहडोल में वर्षों से जड़ी-बूटियों के व्यापार से जुड़े व्यापारी प्रदीप सिंह बघेल ने बताया कि वर्तमान में वन तुलसी की बाजार दरें काफी आकर्षक हैं।

उन्होंने कहा, “हमारा शहडोल जिला एक ट्राइबल बेल्ट है जो घने जंगलों से घिरा हुआ है, जहां बहुमूल्य जड़ी-बूटियां उपलब्ध हैं। वर्तमान में हम ग्रामीणों और किसानों से ₹70 से ₹80 प्रति किलो की दर से वन तुलसी की सूखी पत्तियां खरीद रहे हैं। हमारे पास राष्ट्रीय स्तर की आयुर्वेदिक दवा कंपनियों से लगभग 100 टन वन तुलसी का ऑर्डर है। यदि ग्रामीण जंगल से लाकर या घर में सुखाकर हमें पत्तियां उपलब्ध कराते हैं, तो हम उन्हें तुरंत नकद भुगतान और भविष्य में बेहतर दाम देंगे।”

🩺 श्वसन और चर्म रोगों में अचूक औषधि: जानिए आयुर्वेद डॉक्टर से वन तुलसी के चमत्कारिक गुण

आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. अंकित नामदेव के अनुसार, वन तुलसी (सुरसा) का उपयोग श्वास संबंधी बीमारियों और त्वचा रोगों में प्रचुरता से होता है।

यह सामान्य तुलसी की तुलना में थोड़ी अलग होती है; इसके पौधे और पत्तियां आकार में बड़ी होती हैं और इसमें तीव्र प्राकृतिक सुगंध होती है। इसके प्रमुख औषधीय गुण निम्नलिखित हैं:

  • कीट-पतंगों से बचाव (Insect Repellent): तीव्र सुगंध के कारण इसे घर के आसपास लगाने से कीड़े-मकोड़े दूर रहते हैं।
  • श्वसन संबंधी बीमारियां: इसके पत्तों का काढ़ा या रस दमा, खांसी और फेफड़ों के संक्रमण में अत्यंत लाभदायक है।
  • त्वचा रोग (Skin Diseases): दाद, खाज, खुजली और त्वचा के संक्रमण में इसके पत्तों का लेप तुरंत राहत पहुंचाता है।
  • अन्य लाभ: इसकी जड़ें वाजीकरण गुणों से युक्त होती हैं तथा मंजरी के बीज शुक्राणुवर्धक और शक्तिवर्धक औषधियों में उपयोग किए जाते हैं।
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