नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज शुक्रवार को मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग के बाद इसकी जानकारी दी। रेपो रेट अभी 5.25% पर ही रहेगा। हाल में आए केंद्रीय बजट के बाद एमपीसी की यह पहली बैठक थी।
बाजार, कर्जदार और निवेशक सभी इस बात पर नजरें टिकाए हुए थे कि ब्याज दरों और अर्थव्यवस्था को लेकर क्या संकेत मिलते हैं। रेपो रेट में कोई बदलाव न होने से लोन दरों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
आरबीआई एमपीसी की यह तीन दिन की समीक्षा बैठक 4 फरवरी को शुरू हुई थी। इस बैठक की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की। ज्यादातर अर्थशास्त्री और वित्तीय विश्लेषक यही मान रहे थे कि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होगा। दिसंबर 2025 में इसमें 25 बेसिस पॉइंट (bps) की कटौती की गई थी, जिससे पता चलता है कि रिजर्व बैंक आर्थिक विकास को बढ़ावा देना चाहता है। बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर ने कहा कि पिछली नीतिगत बैठक के बाद से बाहरी चुनौतियां बढ़ी हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि हाल के व्यापारिक समझौतों का सफल समापन आर्थिक दृष्टिकोण के लिए अच्छा संकेत है। कुल मिलाकर, उन्होंने कहा, निकट अवधि में घरेलू मुद्रास्फीति और विकास का दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। रेपो दर अपरिवर्तित रहने के साथ, स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) दर 5 प्रतिशत पर बनी हुई है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) दर और बैंक दर 5.5 प्रतिशत पर जारी हैं।
पिछले एक साल में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। कई विशेषज्ञों का मानना था कि रिजर्व बैंक अब पॉलिसी रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखेगा और आगे कोई भी कटौती करने से पहले ‘देखें और इंतजार करें’ की रणनीति अपनाएगा। बड़े बैंकों की रिपोर्टों से यह भी पता चलता है कि दुनिया भर में अनिश्चितता, विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव और सरकारी बॉन्ड यील्ड का स्थिर रहना, इन सब वजहों से केंद्रीय बैंक मुख्य नीतिगत दर में तुरंत बदलाव करने को लेकर थोड़ा सतर्क रहा।
फरवरी की एमपीसी बैठक ऐसे समय हुई जब हाल ही में केंद्रीय बजट 2026 पेश हुआ है और भारत-अमेरिका के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता भी हुआ है। ये दोनों ही चीजें आर्थिक विकास और महंगाई को प्रभावित कर सकती हैं। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए, बाजार के जानकारों ने सिर्फ रेपो रेट के फैसले पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि इस बात पर भी नजर रखी कि रिजर्व बैंक बाजार में नकदी (लिक्विडिटी) को कैसे संभालेगा और महंगाई व विकास के बीच संतुलन कैसे बनाएगा।

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