April 23, 2026

News Prawah

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उज्जैन पुलिस बनाम अंधा कानून !

बेगुनाह लोगो पर कर रहे झुठे प्रकरण दर्ज, नेता, वकील, पत्रकारो से भी निकाल रहे खुन्नस

Ujjain : यदि आपको देश प्रदेश में किसी के भी खिलाफ झुठा और मनगढ़त प्रकरण दर्ज करना है तो तत्काल उज्जैन पुलिस से सम्पर्क करें, मामले की बगैर जांच पड़ताल और व्यक्ति क्या है कौन है जाने बगैर ही उज्जैन पुलिस आपकी तत्काल कायमी कर लेगी, अब ये सब सेटिंग से हो रहा है या फिर यहां रामराज्य चल रहा है ये तो हम नही कह सकते लेकिन पिछले कुछ मामलों को देखकर आप इस बात का अंदाजा लगा सकते है कि उज्जैन पुलिस इन दिनो झुठे प्रकरण दर्ज करने में माहिर हो गई है फिर चाहे वह प्रकरण किसी नेता के विरुद्ध हो या पत्रकारों के, किसी आम आदमी के विरुद्ध हो या किसी अभिभाषक के, सबमें उज्जैन पुलिस आंखे मूंदकर सीधे एफआईआर कर रही है।

उज्जैन पुलिस के इस अंधे कानून के कारण कई बेगुनाह और बेकसूर लोगो के न सिर्फ रिकार्ड खराब हो रहे है बल्कि वे इस कोरोना काल मे दोहरे मानसिक तनाव में घिर रहे है, पुलिस अधीक्षक सत्येंद्र कुमार शुक्ला और एएसपी अमरेन्द्र सिंह के हाथों में इन दिनों कानून व्यवस्था की कमान है लेकिन दोनों थोड़े ही दबाव प्रभाव में आ जाते है और किसी पर भी झुठी कायमी की अनुशंसा कर देते है दोनो का यह तरीका देखकर बाकी अमला भी जो जचे वो कर रहा है और निरंकुश होता जा रहा है, माधवनगर थाने के कुछ सेटिंगबाज पुलिसवाले तो ताक लगाकर ही बैठे रहते है कि जैसे ही किसी रसूखदार और पत्रकार के खिलाफ मामला आया तत्काल कायमी कर ली जाए ताकि वे इनके सारे धंधों से नजर हटा लें और इनके हाथ जोड़ते फिरे । आईए कुछ मामलों पर नजर डालते है जिनमें पुलिस पर झूठी और मनगढ़त रिपोर्ट दर्ज करने के आरोप लगे है।

मामला 01
ताजा मामला एक एसआई से छेड़छाड़ का है, विक्रम नगर रेलवे स्टेशन के पीछे एक महिला एसआई शराब के नशे में अपने साथी आरक्षक के साथ खड़ी थी, दोनो में बहस होती देख बाईक सवार तीन युवक मदद के लिए रुक गए लेकिन एसआई उल्टा उन्ही से भिड़ ली और विवाद हो गया, महिला एसआई और आरक्षक ने तीनों से मारपीट कर दी जिसमें पुलिस ने छेड़छाड़ जैसी गंभीर धाराओं में युवकों के खिलाफ झुठा प्रकरण दर्ज कर लिया जबकि विवाद में पुलिस को मारपीट की धाराओं में दोनो पक्षो पर रिपोर्ट दर्ज करना थी लेकिन उन्होंने जानबूझकर ऐसी धराये लगाई की लड़को का भविष्य खराब हो और उन्हें मनचले कहा जाए ।

मामला 02 कुछ दिन पहके लाकडाउन में अभिभाषक गोपाल सिंह हीरावत का परिवार इंदौर से मरीज को लेकर आ रहा था, सिंधी कॉलोनी चौराहे पर उनकी प्रवेश को लेकर पुलिसकर्मियों से कहासुनी हो गई, हीरावत ने मौके ओर पहुंचकर मामले को शांत करवाया और वहां से रवाना हो गए लेकिन उज्जैन पुलिस ने गुंडों के माफिक उन्हें आगे टॉवर पर रोका और अभिभाषक, उनकी पत्नी और साले की बर्बरता से पिटाई कर दी और नीलगंगा थाने में एक झुठा प्रकरण भी दर्ज कर लिया बाद में अभिभाषकों ने टॉवर पर प्रदर्शन किया तब जाकर 4 पुलिसकर्मियों को लाईन अटैच किया गया ।

मामला 03 माधवनगर अस्पताल में कवरेज कर रहे पत्रकार राजेश रावत ने एक मरीज की दुर्दशा पर जब मौजूद लोगों से सवाल जवाब किए तो उन्होंने उनके खिलाफ शासकीय कार्य मे बाधा और अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज करवा दिया इसी तरह लाकडाउन का कवरेज कर रहे पत्रकार जितेन्द्र ठाकुर पर भी पुलिस ने ऐसा ही एक झुठा मामला दर्ज कर लिया और उनके साथ मारपीट कर दी बाद में पत्रकारों द्वारा थाने का घेराव करने पर दो आरक्षकों को लाईन अटैच किया गया लेकिन 4 दिन बाद ही उन्हें बहाल नही कर दिया गया ।

मामला 04 शहर की समस्या और ज्वलंत मुद्दों पर बेबाकी से कलम चलाने वाले दो कलमकारों जय कौशल और उमेश चौहान को दबाने के लिए दबाव में एक झुठा प्रकरण दर्ज कर लिया गया जबकि शिकायतकर्ता ने 3 माह पहले जो आवेदन दिया था उसमें सिर्फ अखबार में गलत फोटो छपने की बात कही थी लेकिन जब पुलिस पर सत्ताधारी दल के एक नेता ने दबाव बनाया तो उन्होंने तीन महीने बाद उससे नया आवेदन लेकर दोनो पत्रकारों पर पैसे मांगने की झूठी शिकायत दर्ज कर ली ताकि उनकी कलम को शांत किया जा सके और मास्टरप्लान, सिंहस्थ, सांवराखेड़ी जैसे ज्वलंत मुद्दे बन्द कराये जा सके जबकि पुलिस पुरे मामले की सच्चाई अच्छे से जानती है शिकायतकर्ता खुद अपने मित्र की आत्महत्या में सस्पेक्ट है और सांवराखेड़ी में उसकी भी जमीन है जिसकी मुहिम दोनो पत्रकारों ने चला रखी थी ।

जॉइनिंग के समय ये कहा था एसपी ने ..

हमें अच्छे से याद है पुलिस कप्तान सत्येंद्र कुमार शुक्ला ने जॉइनिंग के समय ली गई अपनी पहली प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि में बगैर भय, राग द्वेष के निष्पक्ष पुलिसिंग ओर फोकस करूंगा और पुरे अमले को भी यही हिदायत दुँगा की वे भी गलत धंधे, कमीशनखोरी, छोड़कर साफ स्वच्छ पुलिसिंग करे चूंकि उस समय झींझर कांड हुआ था और लगातार पुलिसकर्मी उसमें फंस रहे थे साथ ही एसपी ने मीडिया से भी सहयोग की अपेक्षा रखते हुए कहा था कि में किसी भी मीडियाकर्मी पर झूठे प्रकरण दर्ज नही होने दुँगा ये आश्वस्त करता हूँ लेकिन एसपी सत्येंद्र कुमार शुक्ला ने मीडिया से सहयोग लेकर झींझर कांड को तो शांत करा लिया मगर जब मीडिया की बारी आई तो उन्होंने बगैर जांच पड़ताल ही प्रकरण दर्ज करना शुरू कर दिए, उनके कार्यकाल में अब तक 4 सक्रीय पत्रकारों के विरुद्ध झूठे प्रकरण दर्ज हो चुके है वहां नेता, वकील भी उनकी कार्यवाहियों से छूटे नही है, सभी मामलों में कोई अंधा भी कह देगा कि ये कार्यवाहियां गलत है लेकिन जब कानून ही अंधा हो जाये तो क्या कहा जाए, छोटे छोटे दबाव में अगर एसपी स्तर के अधिकारी गलत निर्णय लेने लगे तो फिर कानून व्यवस्था का तो यही हाल होगा जो आज है, हमारा एसपी साहब से निवेदन है कि आईपीएस अधिकारी है जहां रहेंगे इसी पोस्ट पर रहेंगे कोई भी नेता मंत्री या मुख्यमंत्री उन्हें आरक्षक नही बना सकता तो फिर वे क्यों बेवजह दबाव प्रभाव में आकर खाकी की अपनी शपथ को तौड़ रहे है, कृपया निर्भिक और निष्पक्ष पुलिसिंग करे ताकि सचिन अतुलकर जैसा शहर में उनका भी नाम हो और लोग जाने के बाद भी उन्हें याद करे ।

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