PM Narendra Modi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राज्यसभा में अपने भाषण में कहा कि कृषि कानून जरूरी कानून हैं और इन्हें लागू करने का यह सही समय है। उन्होंने किसानों से आंदोलन खत्म करने की अपील की और कहा कि आंदोलनकारियों को समझाते हुए देश को आगे ले जाना होगा। आओ मिलकर चलें। अच्छा कदम है, किसी न किसी को करना था। मैंने किया है, गालियां मेरे हिस्से में जा रही हैं, जाने दो। कृषि मंत्री लगातार काम कर रहे हैं। एक-दूसरे को समझने-समझाने की जरूरत है।
पीएम ने कहा कि किसान आंदोलन कर रहे हैं और यह उनका हक है लेकिन वहां बुजुर्ग बैठे हुए हैं, अच्छी बात नहीं है। उन्हें वापस ले जाइए। हम मिलकर बैठकर बात करेंगे। मैं बार-बार कह रहा हूं। हम सब मिल-बैठकर बात करने को तैयार हैं। मैं आज सदन से भी निमंत्रण देता हूं। पीएम ने किसानों को आश्वासन भी दिया कि था एमएसपी है और एमएसपी रहेगा। हमें भ्रम नहीं फैलाना चाहिए।
पीएम ने किसानों को संबोधित कर कहा कि हमें समझना होगा कि हमारी खेती को खुशहाल बनाने के लिए फैसले लेने का समय है। यही समय है, इस सुधार को आगे ले जाना चाहिए। हमें एक बार देखना चाहिए कि कृषि परिवर्तन से बदलाव होता है कि नहीं। कोई कमी हो तो उसे ठीक करेंगे, कोई ढिलाई हो तो उसे कसेंगे। मैं विश्वास दिलाता हूं कि मंडियां और अधिक आधुनिक बनेंगी। सरकार के तीन नए कृषि कानूनों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए पीएम ने कहा कि हर कानून में अच्छे सुझावों के बाद कुछ समय के बाद बदलाव होते हैं, इसलिए अच्छा करने के लिए अच्छे सुझावों के साथ, अच्छे सुधारों की तैयारी के साथ हमें आगे बढ़ना होगा।
मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि चौधरी चरण सिंह हमेशा किसानों का सेंसस का जिक्र करते थे जिसमें यह बात सामने आई थी कि देश में 33 फ़ीसदी किसानों के पास 2 बीघा से कम जमीन है और 18 फ़ीसदी के पास 2 से 4 बीघे की जमीन है चौधरी चरण सिंह मानते थे कि छोटे किसानों के लिए हालात मुश्किल हैं। पीएम ने आगे कहा कि 1971 में 1 हेक्टेयर से कम जमीन वाले किसानों की संख्या 51 फीसदी थी जो आज बढ़कर 68 प्रतिशत हो गई है।

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