महाराष्ट्र के बदलापुर स्टेशन से पहले महालक्ष्मी एक्सप्रेस कल रात से फंसी हुई थी, जिसमें क़रीब 1050 यात्री सवार थे। इनमें 9 गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। भारी बारिश की वजह से उल्लास नदी का पानी रेलवे ट्रैक पर आने से ट्रेन के दोनों तरफ पायदान तक जलभराव होने के बाद ट्रेन को रोक दिया गया। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और रेलवे की टीमें मौके पर मुसाफिरों को रेस्क्यू करने में जुटी, यही नहीं जल, थल, वायु तीनों सेनाओं की मदद ली गई है। आज सुबह से ट्रेन में फंसे इन यात्रियों को ख़ासी परेशानी का सामना करना पड़ा। पटरियों पर घुटने भर पानी भरा है जिससे कोई ट्रेन आगे नहीं बढ़ पा रही थी, हालांकि देर से ही सही पर लोगों को ट्रेन में खाने-पीने की चीजें मुहैया कराई गईं।
ट्रेन में फंसे लोगों को निकालने के लिए चॉपर से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। एनडीआरएफ की 4 टीमें मौके बचाव कार्य में लगी हुई थी। 7 नेवी की टीमों के साथ-साथ सेना के जवान भी राहत के काम में जुटे। 8 नावों की मदद से लोगों को निकाला गयां। महालक्ष्मी एक्सप्रेस में फंसे यात्रियों को भले ही अब निकालने का काम जोरों से किया जा रहा हो लेकिन यात्रियों का आरोप है कि उन तक मदद पहुंचाने में प्रशासन ने बहुत समय लगा दिया। एक यात्री ने बताया कि बाढ़ की वजह से ट्रेन के रुकने के बाद से ही वह लगातार जीआरपी से लेकर लोकल पुलिस और दूसरे शहर की पुलिस को भी कॉल कर रहे थे लेकिन कोई भी मदद के लिए आने को तैयार नहीं था। अन्य यात्रियों के अनुसार अगर आसपास के गांव वालों ने उनकी मदद नहीं की होती तो उनकी हालत और खराब हो सकती थी। बरहाल सभी 1050 यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया।
महालक्ष्मी एक्सप्रेस, बाढ़ और फोन पर मदद की गुहार

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