विधानसभा चुनाव में हुई भाजपा की हार का मंथन सभी जगह चल रहा है इसी बीच सियासत के बाद मुख्यमंत्री बदल जाने की परंपरा भी मध्य प्रदेश में खास चर्चाओ में है। प्रदेश के 62 साल के इतिहास में अब तक 5 सिहस्थ हो चुके हैं जिस पार्टी के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में सिहस्थ का आयोजन होता है उसकी सिंहस्थ के बाद सरकार चली जाती है। उज्जैन के ज्योतिषाचायो ने भी इसकी पुष्टि की है और बताया कि यह परंपरा राजा विक्रमादित्य के काल से ही चली आ रही है सिहस्थ में अनजाने में हुई गलती और साधुसंत की नाराजगी का कारण हो सकती है।
महाकाल की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ की परंपरा सदियों से चली आ रही है। 12 साल के अंतराल में होने वाले इस धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन में दुनिया भर से लोग शामिल होने आते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के गठन से ही एक अजीब संयोग जुड़ा हुआ चला आ रहा है। इस बार भी सिंहस्थ 2016 में आयोजित किया गया था इसमें भाजपा के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ी भूमिका अदा की थी। सिंहस्थ के पूरा होने के 2 साल बाद लोगों को सरकार बदलने की चुनाव में चर्चा चल रही थी। 11 दिसंबर को हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे ने जिस तरह से भाजपा और शिवराज सिंह चौहान के विजय रथ रोका उसे एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या वाकई सिंहस्थ की वजह से ही मध्य प्रदेश की सत्ता में प्रदेश का परिवर्तन हुआ है।
पंडित आनंद शंकर व्यास ने बताया कि उमा भारती की विदाई सिंहस्थ 2004 के बाद हुई थी। प्रदेश की राजनीति से भी हो गई थी। अप्रैल-मई 2004 में सेहत की तैयारी दिग्विजय सिंह ने बतौर मुख्यमंत्री शुरू की थी फिर 2003 के विधानसभा चुनाव आए और कांग्रेस की सरकार चली गई इसके बाद उमा भारती मुख्यमंत्री बनी थी उमा ने अपने मुख्यमंत्री काल में से संपन्न कराया और अगस्त में उनकी कुर्सी चली गई वहीं सुंदरलाल पटवा कोशिश के बाद 2 बार पदस्थ होना पड़ा पहली बार 1980 में मुख्यमंत्री बने उस समय िंसहस्थ चल रहा था पटवा एक मा भी नहीं टिक पाए और सरकार चली गई इसके बाद 1992 में पटवा सिंहस्थ पूरा कराने के बाद बाबरी ध्वस्त के चलते पूरी सरकार ही बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था।
वहीं श्याम नारायण व्यास ज्योतिषाचार्य ने बताया की प्राचीन समय से ही सिंहस्थ के बाद परम्परा रही है। सरकार बदलती है? 28 वर्ष पूर्व 1992 में 2004 में और 2016 में भी हुआ है। सरकार से सिंहस्थ में द्वारा किये गए कामो से कुछ तो संतुष्ट होते है और कुछ असंतुष्ट संतो के असंतुष्ट होने पर भी कई बार सत्ता परिवर्तित हुई है।
महाकाल मंदिर के महेश पुजारी ने बताया की अवंतिका के राजा केवल महाकालेश्वर है। उनके स्थान पर दूसरा राजा ठहर नहीं सकता, लेकिन सिंहस्थ में सरकार के मुख्यमंत्री देवी देवताओ की जो पूजन करते है उसमें कही न कही कुछ कमी रह जाती है उसका पाप पुण्य सत्ता पर पड़ता है, जिससे सत्ता बदलती हे या बनती है। सत्ता परिवर्तन दोनों ही सरकारों पर होता है। उज्जैन जो भी राजा रहे है वे शहर से बाहर रहकर सत्ता चलते थे।
आंकडे देते है इसकी गवाही
1968 गोविंद नारायण सिंह
1980 में सुंदरलाल पटवा की सरकार
1992 में भी सुंदरलाल पटवा की सरकार
2004 उमा भारती की सरकार
2016 शिवराज सिंह की सरकार

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