मी टू कैंपेन में कई महिला पत्रकारों के यौन शोषण के आरोपों से घिरे विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने महिला पत्रकार प्रिया रमानी के ख़िलाफ़ मानहानि का केस दायर किया है। आपराधिक मानहानि के तहत उन्होंने अपने वकील के ज़रिए ये केस दायर किया है। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर 2 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। एक दिन पहले विदेश से लौटने के बाद एमजे अकबर ने कानूनी कार्यवाही की बात कही थी। एक लिखित बयान में ख़ुद को बेकसूर बताते हुए अकबर ने आरोपों को पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत बताया है। अकबर ने कहा कि झूठ के पैर नहीं होते लेकिन उसमें ज़हर होता है जिसे उन्माद में बदला जा सकता है। अपनी याचिका में एमजे अकबर ने कहा है कि 2016 में प्रधानमंत्री ने उन्हें मंत्री बनाया था। वो मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। अकबर ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने करियर में कई किताबें लिखी है।
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि उन पर लगाए गए आरोपों से न केवल उनकी बदनामी हुई है, बल्कि सालों की कड़ी मेहनत के बाद स्थापित सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंची है। इनसे न केवल उन्हें निजी तौर पर बल्कि, समुदाय, दोस्तों, परिवार और सहयोगियों को भी अपूरणीय नुकसान और जबरदस्त परेशानी हुई है।
एमजे अकबर ने महिला पत्रकार के खिलाफ मानहानि का किया केस

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