इंदौर। होलकर स्टेडियम में खेले गए रणजी फाइनल में विदर्भ की टीम ने इतिहास रच दिया। 83 साल में पहली बार विदर्भ ने रणजी चैम्पियनशिप जीती। विदर्भ ने दिल्ली को 9 विकेट से हराया। अक्षय वकरे ने दिल्ली के 6 बल्लेबाजों को आउट किया। विदर्भ के 547 के जवाब में दिल्ली की दूसरी पारी 280 रनों पर ऑल आउट हो गई।
चौथे दिन विदर्भ ने दूसरी इनिंग में 547 रन बनाए। इसके बाद दिल्ली की टीम दूसरी पारी में 280 पर आलआउट हो गई। उसने विदर्भ को जीत के लिए 32 रनों को अासान टारगेट दिया। विदर्भ ने 5 ओवर में एक विकेट खोकर ये टारगेट हासिल किया। दिल्ली की ओर से कुलवंत ने फैज फजल का विकेट लिया।
फाइनल में हैट्रिक लेने वाले रजनीश गुरबानी को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उन्होंने इस मैच में टोटल 8 विकेट लिए। अक्षय वडकर ने विदर्भ की ओर से पहली इनिंग में 133 रनों की पारी खेली थी। गुरबानी से पहले 1972/73 के फाइनल में मुंबई के खिलाफ तमिलनाडु के बी कल्याण सुंदरम ने हैट्रिक ली थी। उस वक्त मुंबई टीम का नाम बॉम्बे था। सुंदरम के शानदार प्रदर्शन के बाद भी तमिलनाडु की टीम 123 रन से हार गई थी। सेमीफाइल मं गुरबानी के प्रदर्शन की बदौलत ही विदर्भ ने कर्नाटक को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। इस मैच में गुरबानी ने कुल 12 विकेट लिए थे, दूसरी पारी में दूसरी इनिंग में 7 विकेट झटके थे। उनके इस परफॉर्मेंस की बदौलत विदर्भ ने कर्नाटक को हराया था।
83 साल में बाद विदर्भ बना रणजी चैम्पियन, गुरबानी बने प्लेयर ऑफ द मैच

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