अयोध्या का फैसला आने के बाद उज्जैन में बाबा महाकाल 144 धारा में पुलिस छावनी के बीच अपने दरबार से हरि से मिलने पहुंचे। श्री महाकालेश्वर मंदिर से वैकुण्ठ चतुर्दशी रविवार को हरिहर मिलन पर बाबा महाकाल सवारी में सवार होकर निकाले। देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु पाताल लोक में राजा बलि के यहा विश्राम करने जाते हैं। उस समय पृथ्वी लोक की सत्ता शिव के पास होती है और वैकुण्ठ चतुर्दशी के दिन भगवान शिव यह सत्ता विष्णु को सौपकर कैलाश पर्वत पर लौट जाते है। रात के 11 बजे भगवान श्री मनमहेश पूरे राजसी ठाट-बाट के साथ पालकी में विराजित होकर भगवान श्री गोपाल से भेंट करने निकले।
गोपाल मंदिर पहुंच कर पूजन के दौरान बाबा श्री महाकालेश्वर ने बिल्वपत्र की माला श्री गोपाल जी को भेंट की, श्री हरि तुलसी की माला बाबा श्री महाकालेश्वर को भेंट की। पूजन के बाद सवारी पुनः इसी मार्ग से श्री महाकालेश्वर मंदिर वापस आयी।
सवारी के साथ श्री महाकालेश्वर भगवान का ध्वज, मंदिर के पुजारी पुरोहित, जिला कलेक्टर शंशाक मिश्रा, पुलिस अधीक्षक सचिल अतुलकर, पूरे इलाके कड़ी सुरक्षा के बंदोबस्त किया गया था आम पब्लिक को इस सवारी से दूर रखा गया पुलिस बल, विशेष सशस्त्र बल की टुकडियॉ को तैनात किया गया।

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