मध्यप्रदेश में 2018 साल के अंत में विधानसभा चुनाव है। नए साल की शुरूआत से ही आरएसएस की राष्ट्रीय बैठकों के दौर उज्जैन में चल रहा है। संघ चुनावी रणनीति बनाने में जुटी है और उज्जैन में अचानक भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पहुंचने से राजनीतिक सरगर्मियां और भी तेज हो गई है। अमित शाह में बंद कमरे में भागवत से मुलाकात की। इस मुलाकात से भाजपा में फेरबदल, विधानसभा चुनाव और कई मुद्दों पर चर्चा के कयास लगाए जा रहे है।
महाकाल की नगरी में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत कई दिनों तक रहे। भागवत ने भारत माता मंदिर लोकार्पण समारोह और शैव महोत्सव में भाग लिया। पिछले 5 दिनों से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की बैठको का दौर चल रहा है। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश सोनी, भैयाजी जोशी, दतात्रेय होसबोले सहित कई पदाधिकारियों से भागवत ने विचार मंथन किया है।
ऐसे में अचानक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह उज्जैन पहुंच गए। अमित शाह के साथ मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी मौजूद रहे। शाह, शिवराज और विजयवर्गीय तीनों नेताओं ने माधव सेवा न्यास में सीधे मोहन भागवत से मुलाकात की। यह मुलाकात राजनीतिक उठा पटक के लिए अहम हो सकती है, माना जा रहा है कि जल्द ही मध्यप्रदेश भाजपा में फेरबदल हो सकता है।
पिछले कई दिनों से मध्यप्रदेश भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और सांसद नंदकुमार चौहान को हटाए जाने की चर्चा चल रही है, जबकि प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में कैलाश विजयवर्गीय का नाम भी चल रहा है। विजयवर्गीय अमित शाह के करीबियों में से है। ऐसे में हो सकता है कि शाह, शिवराज और विजयवर्गीय से इस मुद्दे पर चर्चा की हो।
शाह और भागवत की बैठक में मध्यप्रदेश में साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भी संघ की रणनीति के बारे में भी चर्चा की गई। संघ बैठकों में मंथन करने के बाद भागवत ने कई मुददों पर चर्चा की है। साथ ही महाराष्ट्र में दलितों को लेकर हुई हिंसा के बारे में भी बात की गई है। भागवत और शाह की यह मुलाकात प्रदेश में कई राजनीतिक समीकरणों को तय कर सकती हैं।
शाह और भागवत की मुलाकात, मध्यप्रदेश में ला सकती है अहम बदलाव

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