देशभर में कई बार छोटे बच्चे इस तरह के बहादुरी के काम कर जाते हैं कि वैसे काम बड़े और समझदार लोग भी करने का नहीं सोच सकते। ऐसे ही बहादुर बच्चों की पहचान करने के बाद उनको वीरता पुरस्कार दिया जाता है, जिससे उनका उत्साह बना रहे और वो ऐसे काम करने में हिचकिचाएं नहीं।
ऐसे ही 22 बच्चों को राष्ट्रीयत वीरता पुरस्कार देने के लिए चयनित किया गया है, जिनमें 10 लड़कियां और 12 लड़के शामिल हैं। इनमें से एक लड़के को यह पुरस्कार मरणोपरांत दिया जा रहा है।
सामान्य सम्मान के तहत प्रत्येक बहादुर बच्चे को 20-20 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाती है। सामान्य पुरस्कार पाने वालों में मणिपुर की 8 वर्षीय लारेंबम याईखोंबा मंगांग, मिजोरम की पौने 17 वर्षीय लालियानसांगा, कर्नाटक की 11 साल की बेंकटेश, छत्तीसगढ के 9 साल के कांति पैकरा, जम्मू कश्मीर के 18 साल के मुदासिर अशरफ, कर्नाटक की 9 साल की आरती किरण शेट, मिजोरम की 11 साल की कैरोलिन मलसामतुआंगी, छत्तीसगढ की 12 साल की भामेरी निर्मलकर, मेघालय के 11 साल की एवरब्लूम के नोंगरम, हिमाचल प्रदेश के 13 साल की अलाईका, असम के 11 साल के कमल कृष्णा दास, केरला के 13 साल के फतह पीके, मिजोरम के 13 साल के बनलालरियातरेंगा, महाराष्ट्र के 11 साल के जेन सदावरते और 15 साल के आकाश मच्छिंद्रा खिल्लारे शामिल हैं।
- केरल के रहने वाले 17 साल के मोहम्मद मुहसिन ईसी ने अपने 3 दोस्तों को गहरे समुद्र में डूबने से बचाया लेकिन खुद समुद्र में डूब गया। उसका शव अगले दिन मिला। इस बहादुर बच्चे को मरणोपरांत अभिमन्यु अवार्ड से नवाजा जाएगा।
- परिषद का सबसे बड़ा सम्मान भारत अवार्ड केरल के ही रहने वाले आदित्य के को प्रदान किया जाएगा। आदित्य ने पर्यटकों से भरी एक बस मे आग लग जाने पर बहादुरी दिखाते हुए उस बस के शीशे तोड़ कर 40 से ज्यादा लोगों की जिंदगी बचाई। आदित्य उस बस में सवार था और आग लगने के बाद बस का ड्राइवर बस छोड़ कर भाग गया था और यात्री धुआं भरने की वजह से चीख पुकार करने लगे थे। ऐसे में आदित्य ने सूझबूझ दिखाते हुए बस के शीशे को तोड़ दिया जिससे यात्री बाहर निकल पाए। भारत पुरस्कार के तहत परिषद की ओर से 50 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाती है। जबकि अभिमन्यु पुरस्कार के तहत 40 हजार रुपये।
- उत्तराखंड जिले के बीरोंखाल ब्लॉक के देवकुंडाई तल्ली गांव की रहने वाली 11 साल की राखी 4 अक्टूबर को अपने 4 साल के भाई राघव को तेंदुए से बचाने के लिए उससे भिड़ गई थी और संघर्ष में गंभीर रूप से घायल हो गई थी। वहीं राखी की मौसी मधु देवी ने बताया कि राखी का परिवार उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले गया, जहां अधिकारियों ने उसे कथित रूप से भर्ती करने से मना कर दिया।
- कर्नाटक के बाढ़ग्रस्त इलाके में एक 12 साल के लड़के ने बहादुरी की जबरदस्त मिसाल पेश की है। बाढ़ में डूबे रास्ते पर एक एंबुलेंस को रास्ता दिखाने के बाद यह लड़का लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। रायचूर जिले के हीरेरायनकुंपी गांव के रहने वाले इस बच्चे ने एक एम्बुलेंस को रास्ता दिखाने के लिए पानी की तेज धार की परवाह भी नहीं की। 12 साल के बच्चे वेंकटेश की इस बहादुरी पर प्रशासन ने 73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
- 26 फरवरी 2019 को बालाकोट एयरस्ट्राइक के एक दिन बाद जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर के आसमान में भारत और पाकिस्तान के लड़ाकू विमान आमने-सामने थे। तब हेलिकॉप्टर के बड़गाम में क्रैश होने की खबर आई। हेलिकॉप्टर क्रैश होने के बाद इस हादसे में 6 भारतीय वायुसैनिकों और एक नागरिक की मौत हो गई थी। मुदासिर ने आग में फंसे शख्स किफायत हुसैन को बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश की लेकिन दुर्भाग्य से हुसैन ने बाद में दम तोड़ दिया। ऐसा ही कारनामा 18 साल के अशरफ ने भी किया।
- जम्मू और कश्मीर से राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार के लिए चुने गए दूसरे बच्चे सरताज की बहादुरी की कहानी भी कुछ कम नहीं। 16 साल 7 महीने का सरताज कुपवाड़ा के तुमिना गांव में अपने घर की पहली मंजिल पर था कि आर्टिलरी का एक गोला वहां आकर फटा, ये घटना 24 अक्टूबर 2019 की है। उस वक्त पाकिस्तानी सेना की ओर से चौकीबल और तुमिना में बिना किसी उकसावे के भारी गोलाबारी की जा रही थी। सरताज ने पहली मंजिल से छलांग लगा दी। सरताज को तब अहसास हुआ कि उसके माता-पिता और बहनें सानिया 8 वर्ष और सादिया 2 वर्ष घर के अंदर फंसे हुए हैं। छलांग लगाने से टांग में गंभीर चोट आने के बावजूद सरताज घर में घुसा और माता.पिता, बहनों को सुरक्षित बाहर ले आया फिर देखते ही देखते सरताज का घर मलबे में बदल गया।
- महज 13 साल की अलाइका उस वक्त अपने माता, पिता और दादा के लिए फरिश्ता बन गईं, जब उनकी कार अचानक रोड से नीचे खाई में गिरने लगी। पालमपुर के पास कार अचानक खाई में जाने लगी। किस्मत अच्छी थी कि एक पेड़ के तने से टकराकर वह रुक गई। इस हादसे के बाद अलाइका सबसे पहले होश में आई और लोगों को मदद के लिए बुलाया।
- 1 मई 2019 को 15 साल के आदित्य केरल के 42 अन्य पर्यटकों के साथ नेपाल की यात्रा से लौट रहे थे। भारतीय सीमा से करीब 50 किलोमीटर पहले बस में आग लग गई। आग लगते ही ड्राइवर मौके से फरार हो गया, जबकि 5 बच्चों और कुछ बुजुर्गों समेत तमाम यात्री बदहवास थे। बस के दरवाजे बंद थे। इस बीच आदित्य ने हथौड़े से बस का पिछला शीशा तोड़ दिया। इस दौरान उनके हाथ और पैरों में शीशे से चोटें भी लगीं। आदित्य की यह वीरता ही थी कि बस के डीजल टैंक के फटने से पहले सभी यात्री निकल पाए।
- 24 अक्टूबर 2019 की बात है। कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के चौकीबल और तुमिना में पाकिस्तान ने फायरिंग शुरू कर दी। 16 साल के मुगल उस वक्त घर में ही थे। उनके घर की पहली मंजिल पर पाकिस्तान का एक गोला आकर गिरा। वह बाहर निकल आए, लेकिन तभी उन्हें याद आया कि उनके पैरेंट्स और दो बहनें अभी अंदर ही हैं। इसके बाद वह तुरंत घर गए और अपनी दो बहनों को सुरक्षित निकालकर लाए। इसके बाद मकान ढहने से पहले उन्होंने माता और पिता को भी जगाकर बाहर निकलने।
- असम के मास्टर कमल कृष्ण दास, छत्तीसगढ़ की कांति पैकरा और वर्णेश्वरी निर्मलकर, कर्नाटक की आरती किरण सेठ और वेंकटेश, केरल के फतह पीके, महाराष्ट्र की जेन सदावर्ते और आकाश मछींद्र खिल्लारे को दिया जाएगा। इसके अलावा मिजोरम के तीन बच्चों और मणिपुर व मेघालय से एक एक बच्चे को वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया है।

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