इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ के ज़िलाधिकारी और पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि लखनऊ में प्रदर्शनकारियों की तस्वीरों और उनके पते लगे हुए पोस्टर्स और होर्डिंग्स को 16 मार्च तक हटा लिया जाए। मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने ये निर्देश देते हुए 17 मार्च तक कार्यवाही रिपोर्ट रजिस्ट्रार जनरल के दफ़्तर में जमा कराने का निर्देश दिया है।
कोर्ट परिसर में मौजूद वकील एसएम नसीम ने मीडिया को बताया कि हाईकोर्ट ने इस मामले में बेहद सख़्त रुख़ अपनाया और कहा कि ये नागरिकों की निजता का हनन है और इन्हें तत्काल हटा लिया जाए। नसीम ने बताया कि राज्य सरकार के महाधिवक्ता की ओर से इस बारे में दी गई दलीलों को कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया और पोस्टर्स लगाने को नागरिकों की निजता का हनन माना है। कोर्ट के इस आदेश पर राज्य सरकार की अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी ने कोर्ट के इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इस फ़ैसले से लोगों का क़ानून पर भरोसा बढ़ा है। दारापुरी का नाम भी उन लोगों में शामिल है जिनकी तस्वीरें होर्डिंग्स पर लगाई गई हैं।
दारापुरी कहते हैं कि हाईकोर्ट ने बता दिया है कि प्रदेश में क़ानून का राज चलेगा और न कि योगी आदित्यनाथ की तानाशाही। लगता है कि योगी सरकार हम लोगों की मॉब लिंचिंग कराने की तैयारी कर रही है। हम दोषी अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्यवाही की मांग करेंगे और इसके लिए अदालत की शरण लेंगे।

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