April 18, 2026

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यूक्रेन के बहाने यह बड़े देश आमने-सामने, यह टकराव का असली कारण

पूर्वी यूरोप में यूक्रेन और रूस के बीच का टकराव अब बड़ा संकट बनता जा रहा है। हाल ही में रूस ने यूक्रेन के कुछ हिस्सों को अलग देश के रूप में मान्यता दे दी है। इसके बाद कई देश रूस के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं। अमेरिका ने रूस के ऊपर आर्थिक पाबंदियां लगाने का ऐलान किया है। जापान और ब्रिटेन जैसे अमेरिका के सहयोगी देश भी रूस के खिलाफ कदम उठाने की तैयारी में हैं।

इन सब के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि ये प्रतिबंध और एक्शन खतरे का संकेत हैं। इस बीत यूक्रेन के पक्ष में अमेरिका का समर्थन कई लोगों के मन में सवाल खड़े कर रहा है। यूक्रेन के मामले में अमेरिका का समर्थन कई इकोनॉमिक फैक्टर्स पर डिपेंड करता है। यूक्रेन तेल के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाता है। ट्रेंडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के अनुसार, यूक्रेन की जीडीपी का साइज महज 164 बिलियन डॉलर के आस-पास है। यह अमेरिका के ज्यादातर राज्यों की जीडीपी से कम है।

दूसरी ओर चाहे कैस्पियन सागर का विशाल तेल भंडार हो या यूरोप के सप्लाई पाइपलाइन हों, यूक्रेन की भूमिका अहम है। क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस के अलावा रेयर अर्थ मिनरल्स के भंडार भी उसे महत्वपूर्ण बनाते हैं। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यूक्रेन डाइरेक्टली अमेरिका के आर्थिक हितों के लिए खास मायने नहीं रखता है। यूक्रेन पूर्वी यूरोप में स्थित है और इस इलाके को यूरोप का गरीब हिस्सा माना जाता है।
यूक्रेन की जीडीपी का साइज भी कोई खास नहीं है। अमेरिका के लिए यूक्रेन से सीधे तौर पर खास आर्थिक लाभ नहीं है, लेकिन परोक्ष रूप से यह फैक्टर मायने रखता है। यूक्रेन की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि जंग होने पर न सिर्फ यूरोप बल्कि एशिया का भी हवाई मार्ग बाधित हो जाएगा। यूक्रेन के रास्ते मध्य यूरोप को होने वाली गैस-तेल सप्लाई भी खतरे में पड़ सकती है।

गौरतलब है कि कच्चा तेल अभी भी ग्लोबल इकोनॉमी की दशा-दिशा तय करता है और अमेरिका किसी भी तरह इस बाजार पर नियंत्रण चाहता है। कच्चा तेल रूस की इकोनॉमी में सबसे ज्यादा योगदान देता है। अगर इसके ऊपर अमेरिका का पूरी तरह से नियंत्रण हो जाए तो वह आसानी से रूस को काबू कर सकता है। अभी रूस के कच्चा तेल और नेचुरल गैस के खरीदारों में यूरोपीय देश सबसे आगे हैं।

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