मैने एक परिस्थिति देखी
परिस्थिति बड़ी अनोखी देखी
परिस्थिति में एक उलझन देखी
उलझन भी बड़ी अनोखी देखी
किसी को कौम पर मरते देखा
किसी को एहतियात बरते देखा
अपने से दूर सबको देखा
अपनों से दूर न किसी को देखा
कुछ मासूम से चेहरे देखे
कुछ हिम्मत वाले अनोखे देखे
किसी को फाके करते देखा
किसी को फासले बनाते देखा
चेहरों पर चेहरे अनोखे देखे
डॉक्टर और पुलिस में फरिश्ते देखे
रोटी के लिए तरसते देखा
रोटी बाटते भी सबको देखा
नेता एक अनोखा देखा
पूरे विश्व को संग चलते देखा
घर में दिया जलते देखा
थाली बजते सबने देखा
सड़को को सुनसान देखा
घरो में फिर मेला देखा
हारते हुए न किसी को देखा
कोरोना से सबको लड़ते देखा
प्रो. वन्दना जोशी
मैने एक परिस्थिति देखी : प्रो. वन्दना जोशी

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