मुझे बारिशों पर लिखना पसंद है,
वजह ठोस मालूम नही कि..
बादलों की आंखमिचोली है
या मिट्टी की खुशबू सौंधी अलबेली है
वातावरण पर पड़ती बौछारें है
या बादलों की ललकारें है,
कागज़ की नाव बनानें के मौके है,
या ठंडी हवा के झोंके है,
छतरियों की सड़कों पर शिरकत है,
या पकोड़े खाने की हसरत है..
वजह..?
शायद नहीं पता …
बस माहौल में जब भी बारिशें है
समझों लिखने की ख्वाहिशें है
-अनुपमा शर्मा

More Stories
माता की घट स्थापना, समय और नौ दिनों में क्या है विशेष
28 सितंबर से 2 अक्टूबर 2024 तक चलेगा “सुजल शक्ति अभियान’’
महाकाल मंदिर के पास दीवार गिरी, 2 लोगो की मौत 2 घायल, एसपी कलेक्टर मौके पर