महाकाल मंदिर में एक दिन पहले यानी चतुर्दशी को दिवाली मनाई जाती है, लेकिन 23 साल बाद यह विशेष संयोग आया है, जब चतुर्दशी और अमावस्या एक ही दिन हैं। शिवभक्तों में इसे लेकर खासा उत्साह है और उज्जैन के साथ-साथ ज्योतिर्लिग महाकाल मंदिर में तैयारियां जोरों पर हैं। परंपरानुसार राजाधिराज बाबा महाकाल के आंगन में कार्तिक अमावस्या से एक दिन पूर्व दीपपर्व मनाया जाता है।
किंतु इस बार रूप चतुर्दशी और अमावस्या एक ही दिन होने से विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिलिर्ंग में इस बार 27 अक्टूबर को दिवली मनाई जाएगी। 23 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब शिवनगरी की प्रजा अपने महाराजा महाकाल के साथ दीपपर्व मनाएगी।
परंपरानुसार महाकाल मंदिर में चतुर्दशी के अलसुबह भस्मारती में दिवाली मनाई जाती है। इस बार 27 को सुबह 4 बजे यह विशेष पूजा होगी। भगवान को गर्म जल से स्नान कराने के बाद सबसे पहले पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान को केसर, चंदन से निर्मित उबटन लगाएंगी। इसके बाद भगवान को सुगंधित द्रव्यों से स्नान कराया जाएगा। सोने-चांदी के आभूषण धारण कराने के बाद नवीन वस्त्र पहनाएं जाएंगे। इसके बाद अन्नकूट लगाकर फुलझड़ी आरती होगी। शाम को भी दीपावली मनेगी, संध्या आरती में भी भगवान के समक्ष दीप सज्जा कर प्रतीकस्वरूप फुलझड़ी चलाई जाएगी।
महाकाल मंदिर में 26 अक्टूबर से दीपपर्व की शुरुआत हो गई है।
महाकाल मंदिर में इस बार दिवाली होगी कुछ अलग, है यह विशेष संयोग भी

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