प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम मन की बात का यह 34वां संस्करण था। पीएम नरेंद्र मोदी ने आज अपनी बात पर्यावरण के मुद्दे से शुरू की। उन्होंने कहा कि पानी के पास विनाश की भी ताकत है। पर्यावरण में आ रहे बदलाव से बहुत कुछ बदल रहा है। प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ रहा है। सरकार मदद का भरसक प्रयास कर रही है। लोगसेवा भाव से आगे आ रहे हैं। भारत सरकार की ओर से सेना, एनडीआरएफ के जवान सेवा में लगे हैं। बाढ़ में किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है। सरकार ने इंश्योरेंस कंपनी को एक्टिव करने की योजना बनाई है। ताकि किसानों को समय पर क्लेम मिले। उन्होंने कहा कि मौसम को जो पूर्वानुमान मिल रहा है वह सही साबित हो रहा है। हमें भी अपने कार्यकलाप मौसम के अनुसार करें तो नुकसान से बचा जा सकता है।
जीएसटी पर उन्होंने कहा कि इसे लेकर लोगों में उत्साह है। जीएसटी को लागू हुए एक महीना हो रहा है। इससे फायदा हुआ है। चीजें सस्ती हुई हैं। पीएम ने कहा कि उत्तर पूर्व से लोगों ने कहा कि अब काम आसान हो गया है। ट्रांसपोर्ट पर इसका अच्छा असर पड़ा है। सामान की आवाजाह बढ़ी है। लोगों का सामान जल्द पहुंच रहा है। सुविधा हो रही है। पहले इस सेक्टर का काफी समय पेपर वर्क पर लगता था।
पीएम ने कहा कि जीएसटी ने अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। पीएम ने कहा कि इसने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है। दुनिया की यूनिवर्सिटी के लिए एक विषय बनेगा। इतने बड़े देश में सफलतापूर्वक लागू करना और आगे बढ़ना एक सफलता है। जीएसटी लागू करने में सभी राज्यों की भागीदारी है और सभी की जिम्मेदारी है। सभी राज्यों ने सर्वसम्मति से लागू किया है।
पीएम ने कहा कि अगस्त क्रांति का महीना है। इस दौरान भारत में आजादी की क्रांति हुई। इस महीने में कई घटनाएं आजादी से जुड़ी हैं। इस वर्ष भारत छोड़ो की 75वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं। भारत छोड़ो, यह नारा डॉ यूसुफ मेहर अली ने दिया था। इतिहास के पन्ने भारत की आजादी की प्रेरणा है।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के आह्वान पर पूरा देश एक आंदोलन में शामिल हो गया। युवा आगे आए। सभी बड़े नेताओं को अंग्रेजों ने जेल में डाल दिया। असहयोग आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में महात्मा गांधी के 2 अलग अलग व्यक्तित्व दिखाई देते हैं। भारत छोड़ो में महात्मा गांधी ने करो या मरो का नारा दे दिया था। भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम 1857 में हुआ। तब से 1947 तक आंदोलन चलता गया। पीढ़िया बदलती गईं लेकिन आंदोलन चलता रहा। देश हर प्रयास करता गया। 1857-1942 में आजादी की ललक जन जन तक पहुंची। उन्होंने अपील की कि 2017 के 15 अगस्त को संकल्प दिवस के रूप में मनाए। उन्होंने कहा कि लोग अपने देश में सुधार के लिए संकल्प लें।
मन की बात में जीएसटी से अर्थव्यवस्था, आजादी, और महात्मा गांधी पर बोले मोदी

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