ईरान के करज में आयोजित एशियाई केनो सलालम चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में मजदूर की बेटी शिखा चौहान का भी चयन हुआ है। इंदौर के महू नाका स्थित बालदा कालोनी की पहचान शहर की पिछड़ी बस्तियों में होती है। यहीं रहकर मकान बनाने में मजदूरी करने वाले संजय चौहान ने कभी सोचा नहीं होगा कि उनकी बेटी कभी विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। टीम में शिखा समेत इंदौर से 4 खिलाड़ी शामिल हैं। एशियाई चैंपियनशिप 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक होगी। टीम में इंदौर की आहना यादव, शिखा चौहान, सानिया पिंगले तथा प्रदुन्य सिंह राठौड़ शामिल हैं। चारों खिलाड़ी इससे पहले मलेशिया में भी देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, लेकिन तब टीम शीर्ष 6 में जगह बनाने में सफल रही थी। छत्रीबाग स्थित एक स्कूल की 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली 15 साल की शिखा ने कभी सोचा नहीं था कि नाव पर बैठकर खेले जाने वाले खेल में वह भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। वह अपने भाई जयेश और बहन चांदनी के साथ महू नाका स्थित तरणताल में तैराकी सीखने जाया करती थी। यहीं योगेंद्र सिंह राठौड़ ने शिखा की प्रतिभा पहचानते हुए उसे इस खेल से जोड़ा और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। केनो सलालम के अभ्यास के लिए शिखा सामान्यतः तरणताल में ही नाव चलाती है, जबकि कुलदीप सिह किरार के मार्गदर्शन में विशेष तैयारी के लिए महेश्वर स्थित सहस्त्रधारा जाती हैं। इनके दोनों भाई-बहन भी अच्छे खिलाड़ी हैं। रवाना होने के पहले शहर के चारों खिलाडियों को सम्मानित किया गया।
मजदूर पिता की बेटी ईरान में करेगी भारत का प्रतिनिधित्व

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