April 22, 2026

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बालेश्वर ने स्कूल के लिए दान कर दी अपनी सारी जमीन, एक अनोखी मिसाल

गया में एक बालेश्वर मांझी है। दीन-हीन, दुर्बल, लेकिन दानवीर ऐसे कि उनके समक्ष श्रद्धा से बड़े-बड़ों के शीश झुक जाते हैं। गुजर-बसर के लिए सरकार से बीत्ता भर जमीन मिली थी।
अपने घरौंदे के लिए उसका एक कोना रखकर बाकी 27 डिसमिल जमीन वे विद्यालय के लिए दान कर दिए। खुद मजदूरी कर परिजनों का भरण-पोषण कर रहे। गया जिला में बाराचट्टी प्रखंड अति नक्सल प्रभावित है। उसी का एक गांव बलथर टोला कलवर है। दो दशक पहले तक उस गांव में कोई विद्यालय नहीं था और अगल-बगल के स्कूल कोसों दूर। गरीब-फटेहाल बच्चे बेवजह टकते रहते।
बालेश्वर मांझी को यह मंजूर नहीं था कि आने वाली पुस्तें भी उनके जैसे ही अभिशप्त हों। पहले तो उन्होंने प्राथमिक विद्यालय के लिए अपनी 5 डिसमिल जमीन दान की। उत्क्रमित कर उसे मध्य विद्यालय बनाने का मौका आया तो भी कोई दूसरा दाता नहीं मिला, जबकि गांव में कई भू-स्वामी हैं। समाज के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की प्रतिबद्धता वाले बालेश्वर ने अंततः अपनी 22 डिसमिल जमीन भी दान कर दी। उनकी जमीन पर आज कलवर माध्यमिक विद्यालय का भवन सीना ताने खड़ा है।
विद्यालय में आज 326 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे। उनमें भी 178 छात्राएं। यह उस इलाके में बदलाव की कहानी है, जहां इस सदी की शुरुआत तक लड़कियां गांव से बाहर कदम तक नहीं रखती थीं। लड़के स्कूल के बजाय मजदूरी करने जाते थे। समवेत स्वर में ग्रामीण इस बदलाव का श्रेय बालेश्वर मांझी को दे रहे हैं। बालेश्वर के त्याग से स्थापित स्कूल में पढ़-लिखकर कई बच्चे ओहदेदार बन गए।

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