April 23, 2026

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पाकिस्तान से आई झुलेलाल की ज्योत, हिन्दूस्तान में कहलाती है अमरलाल ज्योत

सिंधी समुदाय का त्योहार भगवान झुलेलाल का जन्मोत्सव चेटीचंड के रूप में पूरे देश में हर्षोल्लास से मनाया जाता है। साथ भारत के साथ पाकिस्तान में भी झुलेलाल का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। पाकिस्तान से झुलेलाल की ज्योत उज्जैन में भी लाई गई थी जिसे आज भी अमर ज्योत के नाम से जलाया जाता है। ंिसधी समुदाय में इसका बहुत महत्व माना जाता है।
सिंधी समाज के आराध्य भगवान झुलेलाल के कई नाम है पल्ले वारो, उडेरो लाल, अमरलाल, लाल साई, ज्योति नवारो, सिंध वारो, वरूण देव, मशली वारो के नाम पुकारा जाता है। पाकिस्तान में जब मुस्लमानों से हिन्दूओं पर कहर बरपाना शुरू किया तो सिंधी सिंध नदी के तट पर आ पहुंचे और परेशान होकर वरूण देव की उपासना करने लगे। माना जाता है तब झूलेलाल भगवान सिंध नदी से प्रकट हुए थे उसी दौरान झूलेलाल की ज्योत जलाकर उनकी पूजार्चना की टैब से ही अखण्ड ज्योत हर झूलेलाल मंदिर में जलती है और उसकी ज्योत के दर्शन कर समाज जो भी मांगता है उसकी मनोकामना पूरी होती है चूंकि भगवान झूलेलाल जल के देवता हैं अतः यह सिंधी लोग के आराध्य देव माने जाते हैं। तब चेटीचंड को उत्सव के रूप में मनाया जाता था। मन्नतें मांगी जाती थी और भंडारा किया जाता था। उज्जैन के झुलेलाल मंदिर में अमरलाल की ज्योत जलाई जाती है। यह ज्योत पाकिस्तान से हिन्दूस्तान आई थी जिसे पाकिस्तान झुलेलाल की ज्योत बोलते है। यह ज्योत सवा पांच किलो की होती है।
सिंध नदी में से प्रकट होने कारण इसी दिन को भगवान झूलेलाल जन्मोत्सव मनाया जाता है। आज भी समुद्र के किनारे रहने वाले जल के देवता भगवान झूलेलाल जी को मानते हैं। सिंधी समाज का चेटीचंड विक्रम संवत का पवित्र शुभारंभ दिवस है। इस दिन विक्रम संवत 1007 सन् 951 ई में सिंध प्रांत के नसरपुर नगर में रतनराय के घर माता देवकी के गर्भ से प्रभु स्वयं तेजस्वी बालक उदयचंद्र के रूप में अवतार लेकर पैदा हुए और पापियों का नाश कर धर्म की रक्षा की।
भगवान झूलेलाल का जिन मंत्रों से इनका आह्वान किया जाता है उन्हें लाल साईं जा पंजिड़ा कहते हैं। वर्ष में एक बार सतत चालीस दिन इनकी अर्चना की जाती है जिसे लाल साईं जो चाली ओ कहते हैं। इन्हें ज्योतिस्वरूप माना जाता है अतः झूलेलाल मंदिर में अखंड ज्योति जलती रहती है, सालो से यह सिलसिला चला आ रहा है।
चेटीचंड महोत्सव पर कई स्थानों पर भव्य मेले भरते हैं और शोभायात्रा निकाली जाती है। पूरे विश्व में चैत्र मास की चंद्र तिथि पर भगवान झूलेलाल की जयंती बड़े उत्साह, श्रद्धा एवं उमंग के साथ मनाई जाती है।

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