कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी, यम चतुर्दशी और रूप चतुर्दशी या रूप चौदस कहते हैं। यह पर्व नरक चौदस और नरक पूजा के नाम से भी प्रसिद्ध है। इस दिन यमराज की पूजा करने और व्रत रखने का विधान कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो व्यक्ति सूर्योदय से पूर्व अभ्यंग स्नान यानी तिल का तेल लगाकर अपामार्ग ;यानी कि चिचिंटा या लट जीरा की पत्तियां जल में डालकर स्नान करता है, उसे यमराज की विशेष कृपा मिलती है। नरक जाने से मुक्ति मिलती है और सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। स्नान के बाद सुबह-सवेरे राधा-कृष्ण के मंदिर में जाकर दर्शन करने से पापों का नाश होता है और रूप.सौन्दर्य की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि महाबली हनुमान का जन्म इसी दिन हुआ था इसीलिए बजरंगबली की भी विशेष पूजा की जाती है।
इस बार नरक चतुर्दशी बुधवार 18 अक्टूबर को मनाई जा रही है। अभ्यंग स्नान का मुहूर्त सूर्योदय से पूर्व और चंद्रमा के उदय रहते हुए सुबह 04.47 से सुबह 06.27 तक रहेगा। इसकी अवधि 1 घंटे 40 मिनट रहेगी। यम दीपदान का पूजन मुहूर्त शाम 6 से शाम 7 बजे तक रहेगा। यम दीपदान के लिए चार बत्ती वाला मिट्टी का दीपक घर के मुख्य द्वार पर रखना चाहिए।
नरक चतुर्दशी: जाने महत्व, क्या विशेष करे आज के दिन, शुभ मुहूर्त

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