नई दिल्ली। केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर एक लेख के माध्यम से सवाल उठाने के बाद पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा पहली बार मीडिया के सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि बहुत दिनों से हम जानते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था में गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में गिरावट के लिए हम इससे पहले की सरकार को दोष नहीं दे सकते, क्योंकि हमें पूरा मौका मिला है। यशवंत सिन्हा ने कहा कि मैं जीएसटी के फेवर में रहा हूं। लेकिन सरकार ने इसे जुलाई से लागू करने में जल्दबाजी की। उन्होंने कहा कि सबसे पहले सरकार को बैंकों की स्थिति में सुधार के लिए काम करना चाहिए था।
बैंकों का 8 लाख करोड़ रुपए एनपीए में फंसा हुआ है। देश की अर्थव्यवस्था में गिरावट हुई है। मुझे लगा कि बात को सामने रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शायद अर्थव्यवस्था के बारे में राजनाथ सिंह और पीयूष गोयल मेरे से ज्यादा जानते हो। ऐसे में अगर वो यह सोचते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था है तो मैं इससे सहमत नहीं हूं। उन्होंने कहा कि आज देश की जनता चाहती है कि रोजगार मिले, लेकिन जिससे पूछा वो यही कहता है कि रोजगार है ही नहीं।
बैंकों की स्थिति अच्छी नहीं है, इस कारण बैंकों ने कर्ज देना बंद कर दिया है, अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हुई है। नोटबंदी और जीएसटी लागू करने से स्थिति दिन पर दिन बिगड़ती गई। उन्होंने कहा कि मैं जीएसटी कमेटी में था। गुजरात सरकार के विरोध के बावजूद भी मैंने जीएसटी पर कदम आगे बढ़ाए।
देश की अर्थव्यवस्था पर बोले यशवंत सिन्हा, यहा ध्यान देने की जरूरत

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