अखबार की एक रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई भी क़ानून मीडिया को गोपनीय काग़ज़ात प्रकाशित करने से नहीं रोक सकता। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजय के कौल ने अपने एक फ़ैसले में एक बार फिर प्रेस की आज़ादी की अहमियत पर ज़ोर दिया।
अदालत ने कहा कि न तो भारतीय संसद का बनाया कोई क़ानून और न अंग्रेज़ों का बनाया ऑफ़िशियल सीक्रेट ऐक्ट मीडिया को कोई दस्तावेज़ या जानकारी प्रकाशित करने से रोक सकता है और न ही कोर्ट इन दस्तावेज़ों को गोपनीय मान सकता है।
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर आरटीआई या सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी देने से इनकार नहीं कर सकती है।
हालांकि अदालत ने अपने फ़ैसले में ये भी कहा है कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ जानकारी मांगने भर से जानकारी मिल जाएगी। सूचना मांगने वाले को अपने तर्कों से ये साबित करना होगा कि ऐसी जानकारी छिपाना, जानकारी देने से ज़्यादा नुक़सानदेह हो सकता है।
गोपनीयता के नाम पर मीडिया की रिपोर्ट नहीं रोकी जा सकती : सुप्रीम कोर्ट

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