मध्यप्रदेश को रणजी ट्रॉफी दिलाने वाले कोच चंद्रकांत पंडित की कहानी भी बिल्कुल वैसी ही है। 1998 में इसी मैदान पर चंद्रकांत पंडित की कप्तानी में मध्यप्रदेश की टीम रणजी का फाइनल मुकाबला हार गई थी। आज 23 साल बाद पंडित ने टीम एमपी का कोच बनकर वो कसक पूरी कर दी और रणजी टूर्नामेंट में इतिहास रच दिया। पिछले कई सालों से क्वार्टर फाइनल में भी नहीं पहुंच पाने वाली टीम ने कोच चंदू पंडित की मेंटरशिप में रणजी का फाइनल मुकाबला जीत लिया।
एमपी क्रिकेट के इस नए युग की नींव साल 2019 में रखी गई। जब चंदू पंडित को कोच बनाकर लाने का फैसला हुआ। शुरुआती दौर में चंद्रकांत की आलोचना भी खूब हुई। उन्होंने कई सीनियर्स को बाहर का रास्ता दिखाया, लेकिन बाकी टीम के लिए साफ मैसेज दिया कि टीम स्पिरिट और अनुशासन से बढ़कर कुछ नहीं।
खिलाड़ियों को स्टेडियम के भीतर मोबाइल लाने की इजाजत नहीं थी। बस से उतरते ही खिलाड़ियों को अपना मोबाइल जमा करना होता था। जब वे स्टेडियम से निकलते थे, तभी उन्हें मोबाइल फोन दिया जाता था। ऐसा करने का मकसद यही था कि खिलाड़ी बाहर की दुनिया से दूर सिर्फ क्रिकेट पर ध्यान लगाएं।

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