एक ओर जहां जबलपुर मंडल से जुड़ने वाले विभिन्न रेलखंडों पर मल्टीट्रैकिंग का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं मानिकपुर-जबलपुर-इटारसी के बेहद महत्वपूर्ण रेलमार्ग पर तीसरी लाइन की योजना अभी भी अंतिम स्वीकृति के लिए अटकी हुई है। करीब 519 किलोमीटर लंबे इस दोहरी लाइन वाले व्यस्त रेलखंड पर रोजाना औसतन दो सौ से ज्यादा यात्री और मालगाड़ियों का संचालन किया जाता है, जिससे पटरियों पर भारी दबाव बना रहता है।
⏳ कम ट्रैक क्षमता और ट्रेनों की लेटलतीफी: आउटर पर रुकने को मजबूर गाड़ियां, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें
ट्रेनों की लगातार बढ़ती संख्या के मुकाबले ट्रैक की क्षमता कम होने के कारण अक्सर यात्री ट्रेनों को स्टेशनों के आउटर पर रोकना पड़ता है। इसका सीधा और बुरा असर ट्रेनों की समयबद्धता (पंकचुएलिटी) पर पड़ रहा है। ट्रेनों के विलंब से चलने के कारण यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिम मध्य रेल की ओर से इस प्रोजेक्ट की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर परीक्षण के लिए रेलवे बोर्ड भेजी जा चुकी है, लेकिन हरी झंडी न मिलने के कारण काम शुरू नहीं हो पा रहा है।
🔗 कनेक्टिंग रूट्स पर तेज हुआ काम: कटनी-बीना और कटनी-शहडोल खंड पर चौथी लाइन को मिल चुकी है मंजूरी
यह महत्वपूर्ण रेलमार्ग कोलकाता-मुंबई के पुराने रूट का हिस्सा होने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और बिहार को महाराष्ट्र तथा दक्षिण भारत से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। राहत की बात यह है कि इससे जुड़े अन्य खंडों पर काम तेजी से हो रहा है; जैसे मानिकपुर-प्रयागराज के बीच तीसरी लाइन का काम शुरू हो चुका है, कटनी-बीना लाइन तैयार है और कटनी-शहडोल-अनूपपुर खंड पर चौथी लाइन को भी स्वीकृति मिल चुकी है। ऐसे में बीच के इस मुख्य हिस्से पर भी जल्द मुहर लगने की उम्मीद है।

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