जबलपुर। सरकारी अस्पतालों में जरूरतमंद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों द्वारा सहयोग की पहल पर प्रशासनिक अड़चनों का मामला सामने आया है। राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने आरोप लगाया है कि उन्होंने समाजसेवी संस्था के माध्यम से डिंडोरी जिले के अस्पताल को डायलिसिस मशीन दान देने की पेशकश की थी, जिसे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बिना शासन की अनुमति के मशीन लेने से इनकार करते हुए वापस लौटा दिया। सांसद का कहना है कि एक तरफ सरकार पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं दे पा रही है, वहीं दूसरी तरफ मदद के रास्तों में भी प्रशासनिक रोड़े अटकाए जा रहे हैं।
🏥 अस्पताल प्रबंधन की मजबूरी और ऑपरेटरों की कमी: सीएमएचओ बोले—बिना तकनीकी स्टाफ के अतिरिक्त मशीन चलाना संभव नहीं
इस पूरे मामले पर डिंडोरी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज शुक्ला ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि जिला अस्पताल में पहले से ही 5 डायलिसिस मशीनें हैं, जिनमें से 4 संचालित हो रही हैं, जबकि शाहपुरा में ऑपरेटर न होने के कारण एक मशीन बंद पड़ी है। उनका कहना है कि वर्तमान मशीनें भी आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे चल रही हैं, ऐसे में नई मशीन मिलने पर बिना प्रशिक्षित ऑपरेटर के उसका संचालन करना संभव नहीं है। हालांकि, इस प्रशासनिक खींचतान के बीच जरूरतमंद किडनी रोगियों को मिलने वाली इस बड़ी मदद के अटक जाने से स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

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