Ujjain : एक तरफ मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के मुखिया शिवराज भूमाफियाओं पर नकेल कसने में लगें तो दूसरी तरफ कांग्रेस-बीजेपी के छोटे-मोटे नेता साठ-गाठ करने में लगे हुए है। इस जमीन के खेल में अधिकारियों का भी साथ मिला हुआ है। पार्षद से लेकर टॉप तक सभी इस खेल को खेलते नजर आ रहे है। जी हां ऐसा मामला सामने आया है उज्जैन में नीमनवासा की एक भूमि का।
इस मामले में क्षेत्रीय पार्षद सुंदरलाल मालवीय के साथ ही राजस्व अधिकारी, कर्मचारियों पर सांठगांठ के आरोप लगे हैं। कोठी पर कलेक्टर को ज्ञापन देने पहुंचे। लोगों ने कहा कि पूर्व में 3 सीमांकनों में हमें हमारी भूमि पर काबिज दर्शाया गया, लेकिन चौथी बार हमें हमारी भूमि से मनमाने तरीके से आगे बढ़ा दिया गया, अब हमारी मूल भूमि छीनी जा रही है। भूमि की अफरा तफरी अजीतसिंह ठाकुर और राजस्व अधिकारी, कर्मचारीगण ने मिलकर की है।
ज्ञापन देने पहुंचे लोगों ने मांग की कि भूमि सर्वे क्रमांक 368, 369 के भू भाग पर जो सर्वे नंबर 370 मानकर मनमानी भवन निर्माण अनुज्ञा नगर निगम ने जारी की है, उसे निरस्त किया जाए। जो निर्माण टैगोर इंस्टीट्यूट नामक संस्था द्वारा किया जा रहा है उसे हटवाया जाए। क्योंकि जो निर्माण हो रहा है वह हमारी भूमि सर्वे नंबर 368, 369 पर हो रहा है सर्वे क्रमांक 370 पर नहीं।
गौरतलब है कि यहां सिलाई केंद्र की प्लानिंग सर्वे क्रमांक 370 की भूमि पर होनी थी, लेकिन यहां निर्माण सर्वे क्रमांक 368, 369 पर किया जा रहा है। मोइनउर्रेहमान उस्मानी, गोपाल कुशवाह, दीपक कुशवाह, जगदीश योगी सहित अन्य लोगों ने कोठी पहुंचकर बताया कि भूमि की अफरा तफरी में अजीतसिंह ठाकुर की साजिश पूर्ण रूप से है। समस्त लेखों पर अजीतसिंह ठाकुर के दस्तखत हैं और अजीतसिंह ने हमारे द्वारा भूमि क्रय करने के बावजूद स्वयं के नाम पर निष्पादित मुख्त्यारनामा आम लेख के आधार पर करीब 3-4 लोगों को प्लाट भी बेचे हैं। जगदीश योगी ने बताया कि 30 नवंबर 2011 को अजीतसिंह ठाकुर ने उक्त भूमि हमें 18 लाख में बेची थी।
भूमि खरीदने के बाद भूमि का सीमांकन तत्कालीन पटवारी ओमप्रकाश विश्वप्रेमी ने किया, इसके बाद 2 बार और सीमांकन हुआ। जिसमें तत्कालीन पटवारी सुभाषजी व बाद में पटवारी शर्मा ने किया। 12 जनवरी 2021 को विधिवत रूप से मप्र लोकसेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम 2010 के तहत भूमि का सीमांकन हेतु आवेदन दिया। 21 जनवरी 2021 को पटवारी शंकरलाल कोरट एवं 2 राजस्व निरीक्षकों द्वारा भूमि सीमांकन किया गया परंतु इस दौरान हमारे दस्तावेजों को नहीं देखा।
समीप स्थित अन्य संस्था टैगोर इंस्टीट्यूट फॉर मल्टीपर्पज एजुकेशन, ममता सोनगरा पिता हेमराज सोनगरा की भूमि सर्वे नंबर 370 रकबा 0.520 हे। द्वारा हमारी भूमि सर्वे क्रमांक 368, 369 के भागों पर किये जा रहे अवैध निर्माण को अवैध दर्शाने की बजाये भूमि सर्वे नंबर 370 को और हमारी भूमि सर्वे नंबर 368, 369 के भागों पर दर्शाया गया और हमारी भूमि को आगे की तरफ दर्शाया गया, जिससे हमारे हक और अधिकार प्रभावित हुए। उक्त भूमि सर्वे नंबर 370 को सलीम खान ने अजीतसिंह ठाकुर को बेचा था और अजीतसिंह ठाकुर ने दान पत्र द्वारा उक्त भूमि उपरोक्त संस्था को दी।
इसमें अजीतसिंह ठाकुर दान हो चुकी भूमि को हमारी भूमि में दर्शाकर भूमि हड़पना चाहते है। भूखंड धारकों ने अजीतसिंह ठाकुर पर साजिश रचने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा कि 21 जनवरी 2021 को हुए सीमांकन से असंतुष्ट हैं, इसलिए पुनः भूमि का सीमांकन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में कराया जाए।

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