April 19, 2026

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छठ पर्व का तीसरा दिन आज, सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा

छठ पर्व की धूम है। हर्षोल्लास के साथ छठ पर्व मनाया जा रहा हैं। इस बार छठ पूजा की शुरुआत 17 नवंबर से हुई। इस पर्व की शुरुआत नहाय खाय के साथ होती है। इसके बाद खरना, अर्घ्य और पारण किया जाता है। इसमें विशेष तौर पर सूर्य देवता और छठ माता की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इनकी पूजा से संतान प्राप्ति, संतान की रक्षा और सुख समृद्धि का वरदान मिलता हैं।

चार दिनों तक चलने वाला यह महापर्व मुख्य तौर पर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। 19 नवंबर यानी आज छठ पूजा का तीसरा दिन है और आज संध्या अर्घ्य दिया जाएगा।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सायंकाल में सूर्य अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं। इसलिए छठ पूजा में शाम के समय सूर्य की अंतिम किरण प्रत्यूषा को अर्घ्य देकर उनकी उपासना की जाती है। ज्योतिषियों का कहना है कि ढलते सूर्य को अर्घ्य देकर कई मुसीबतों से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके अलावा सेहत से जुड़ी भी कई समस्याएं दूर होती हैं।

इस बार 19 नवंबर यानी आज के दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। आज के दिन सूर्यास्त की शुरुआत 05 बजकर 26 मिनट पर होगी। इस समय व्रती महिलाएं सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं।

छठ पर्व का तीसरा दिन जिसे संध्या अर्घ्य के नाम से जाना जाता है। यह चैत्र या कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सुबह से अर्घ्य की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। पूजा के लिए लोग प्रसाद जैसे ठेकुआ, चावल के लड्डू बनाते हैं। छठ पूजा के लिए बांस की बनी एक टोकरी ली जाती है, जिसमें पूजा के प्रसाद, फल, फूल, आदि अच्छे से सजाए जाते हैं। एक सूप में नारियल, पांच प्रकार के फल रखे जाते हैं।

सूर्यास्त से थोड़ी देर पहले लोग अपने पूरे परिवार के साथ नदी के किनारे छठ घाट जाते हैं। छठ घाट की तरफ जाते हुए रास्ते में महिलाएं गीत भी गाती हैं। इसके बाद व्रती महिलाएं सूर्य देव की ओर मुख करके डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर पांच बार परिक्रमा करती हैं। अर्घ्य देते समय सूर्य देव को दूध और जल चढ़ाया जाता है। उसके बाद लोग सारा सामान लेकर घर आ जाते है। घाट से लौटने के बाद रात्रि में छठ माता के गीत गाते हैं।

छठ पर्व को लेकर लोगो मे खासा उत्साह हैं और लोग हर्षोल्लास के साथ पर्व मना रहे हैं।

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