April 21, 2026

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बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौर ट्रांसलोकेशन के दूसरे चरण की सफल शुरुआत

भोपाल: बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से ट्रांसलोकेट कर लाये जाने वाले कुल 50 गौर में से द्वितीय चरण के पहले दिन आज 5 गौर, जिनमें एक नर और 4 मादा शामिल हैं, को आज बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कलवाह परिक्षेत्र में निर्मित गौर वाड़े में क्षेत्र संचालक तथा उप संचालक की उपस्थिति में सफलतापूर्वक छोड़ा गया।

उक्त गौर 22 जनवरी 2026 को रिजर्व की टीम द्वारा वहाँ की क्षेत्र संचालक श्रीमती राखी नंदा तथा भारतीय वन्य-जीव संस्थान (WII) के वैज्ञानिक डॉ. पराग निगम के नेतृत्व में चूरना के पास स्थित वन क्षेत्र से कैप्चर किये गये थे। गौर जनसंख्या में आनुवंशिक विविधता (Genetic Variability) सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह गौर पुनर्स्थापना कार्यक्रम भारतीय वन्य-जीव संस्थान (WII) एवं मध्यप्रदेश वन विभाग के संयुक्त सहयोग (Collaboration) से प्रोजेक्ट “Population Management Strategies for Gaur: Supplementation of Gaur in Bandhavgarh Tiger Reserve, Madhya Pradesh” के अंतर्गत किया जा रहा है।

इस प्रोजेक्ट के प्रथम चरण में फरवरी 2025 में 22 गौर बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सफलतापूर्वक पुनर्स्थापित किये जा चुके हैं। 22 से 25 जनवरी 2026 तक संचालित इस गौर ट्रांसलोकेशन ऑपरेशन के द्वितीय चरण में कुल 27 गौरों को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व लाया जाना प्रस्तावित है। गौर परिवहन के लिये कुल 9 परिवहन दल गठित किये गये हैं, जिनमें प्रत्येक दल में एक उप वनमंडल अधिकारी/वन क्षेत्रपाल, एक गौर परिवहन वाहन, दो वन्य-प्राणी चिकित्सक, वनपाल एवं वनरक्षक सहित कुल 10 सदस्य तथा 4 वाहन शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि बाँधवगढ़ लैंडस्केप में वर्ष 1990 के दशक में गौर विलुप्त हो गए थे। क्षेत्र में गौरों की पुनर्स्थापना का कार्य वर्ष 2010-11 में प्रारंभ हुआ, जब कान्हा टाइगर रिजर्व से 50 गौरों को बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में ट्रांसलोकेट किया गया। यह प्रयास अत्यंत सफल रहा और वर्तमान में बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौरों की संख्या 191 से अधिक हो चुकी है।

यह संपूर्ण अभियान बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौर जनसंख्या को सुदृढ़ करने तथा आनुवंशिक विविधता को बनाये रखने के साथ जैव विविधता संरक्षण एवं पारिस्थितिक संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

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