उज्जैन: विक्रम विश्वविद्यालय की कृषि विज्ञान अध्ययनशाला में विशेष व्याख्यान की शृंखला में एक व्याख्यान आयोजित किया गया। यह व्याख्यान मेडिकैप्स यूनिवर्सिटी इंदौर के एग्रीकल्चर के डीन प्रोफेसर एस डी उपाध्याय द्वारा दिया गया।
डॉ उपाध्याय ने बताया कि वर्तमान कृषि शिक्षा और शिक्षण व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे कि विद्यार्थी उद्यमी बनें, न कि नौकरी लेने वाले। वे नौकरी देने वाले बनें। उन्होंने बताया कि शिक्षण व्यवस्था में इस प्रकार के अध्ययन की आवश्यकता है जिससे कि विद्यार्थी उद्यमी बनकर निकलें। उन्होंने शिक्षकों को बताया कि विद्यार्थियों को ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव कार्यक्रम में इस प्रकार की ट्रेनिंग दी जाए जिससे कि वे अपने अध्ययन एवं प्रायोगिक अनुभव के आधार पर ग्रामीण किसानों की लागत में बीस प्रतिशत कमी एवं उत्पादन में बीस प्रतिशत की वृद्धि कैसे लाएं जिससे किसानों को चालीस प्रतिशत अधिक लाभ प्राप्त हो सके और यह किसानों की आय को दोगुना करने की तरफ एक बड़ा कदम होगा।
विशेष व्याख्यान के अध्यक्षता कृषि विज्ञान अध्ययनशाला एवं सांख्यिकी अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष डॉ राजेश टेलर ने की।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. पुष्पेंद्र घोष ने किया तथा आभार डॉ. मोनू विश्वकर्मा ने व्यक्त किया। इस अवसर पर कृषि एवं सांख्यिकी अध्ययनशाला के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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