भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा इंजीनियरिंग छात्रों के लिए जारी किए गए एक जटिल प्रॉब्लम स्टेटमेंट का जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज (JEC) के छात्रों ने शानदार समाधान ढूंढ निकाला है। स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन के दौरान इसरो ने सैटेलाइट से मिलने वाली जानकारी के इस्तेमाल में लगने वाले करीब 30 मिनट के समय को कम करने के तरीके तलाशने का लक्ष्य दिया था। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए जेईसी के मेधावी छात्रों ने एक अभिनव तकनीक का मॉडल तैयार किया है, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है।
⚡ इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव की जगह लेजर का इस्तेमाल: प्रियांशु और विवेक ने समझाई तकनीकी प्रक्रिया
मेकाट्रॉनिक्स ब्रांच के छात्र प्रियांशु मिश्रा और आईटी ब्रांच के छात्र विवेक राजपूत ने बताया कि सैटेलाइट भारत के ऊपर से बहुत तेजी से गुजरते हैं और कई बार केवल आधे घंटे के लिए ही ऊपर रहते हैं। पारंपरिक रूप से डेटा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव के जरिए मिलता है, जिसमें समय अधिक लगता है। छात्रों ने इस प्रक्रिया में सुधार करते हुए लेजर किरणों के जरिए डेटा प्राप्त करने की तकनीक पर काम किया है। इस मॉडल की खासियत यह है कि यदि बीच में कोई बाधा (जैसे मीटोराइट) आ भी जाए, तो भी डेटा क्रैश नहीं होता और छूटा हुआ डेटा रिकवर किया जा सकता है।
🔬 इसरो के वैज्ञानिकों ने भी सराहा मॉडल: एचओडी डॉ. जेएस ठाकुर बोले- सैटेलाइट तकनीक में आएगा बड़ा बदलाव
कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. जेएस ठाकुर ने बताया कि युवा इंजीनियरों ने इसरो द्वारा दिए गए इस प्रॉब्लम स्टेटमेंट को काफी हद तक सफलतापूर्वक हल कर लिया है। इसरो के वैज्ञानिकों ने भी इस वर्किंग मॉडल को देखा है और इसमें सुधार के लिए बहुमूल्य सुझाव दिए हैं। यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाया जाता है, तो आपदा प्रबंधन, मौसम की सटीक जानकारी और कृषि क्षेत्र में देश को एक क्रांतिकारी लाभ मिल सकेगा।

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