मध्य प्रदेश के दमोह जिले में आस्था और मूर्तिकला का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। यहां के कलाकारों की कला अब केवल दमोह तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि प्रदेश की सीमाओं को लांघकर दूसरे राज्यों तक अपनी धाक जमा चुकी है। दमोह जिले के हिंडोरिया गांव के एक हुनरमंद मूर्तिकार के हाथों गढ़ी गई मां दुर्गा की भव्य और आकर्षक प्रतिमाएं इस बार उत्तर प्रदेश के झांसी और कला नगरी जयपुर तक पहुंच चुकी हैं, जिनकी हर तरफ चर्चा हो रही है।
🌟 इंस्टाग्राम से मिली ग्लोबल पहचान: जयपुर से आया किन्नरों का दल, क्रेन और ट्रक से भेजी गई 12 फीट ऊंची महाविराट प्रतिमा
हिंडोरिया निवासी छोटे लाल पटेल, जिनके पिता खेमचंद पटेल भी मूर्तियां बनाया करते थे, महज 15 साल की उम्र से इस पुश्तैनी काम से जुड़े हैं। वे हर साल लगभग 60 से 70 मूर्तियां तैयार करते हैं। छोटे लाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अपनी कला के फोटो और वीडियो साझा करते हैं, जिन्हें देखकर जयपुर के लोगों ने उनसे संपर्क किया था। इस साल जयपुर से आए एक दल ने उनके द्वारा बनाई गई 12 फीट ऊंची और 9 मुख तथा 18 भुजाओं वाली महाविराट स्वरूप मां दुर्गा की प्रतिमा की बुकिंग की थी, जिसे क्रेन की मदद से एक बड़े ट्रक में लोड कर जयपुर भेजा गया है।
🛠️ सांचे से नहीं, हाथों से तराशते हैं चेहरा: बिना आधुनिक रंगों के प्राकृतिक कल्पना से करते हैं मां का श्रृंगार
अन्य मूर्तिकारों से अपनी कला को अलग बताते हुए छोटे लाल कहते हैं कि वे किसी भी प्रतिमा के चेहरे को सांचे से नहीं बल्कि अपने हाथों से तराशते हैं, जिससे हर मूर्ति का भाव और चेहरा अलग नजर आता है। इसके अलावा, वे आधुनिक रंगों या रेडीमेड साधनों के बजाय अपनी कल्पना और कला के आधार पर प्रतिमाओं का मनमोहक श्रृंगार करते हैं। बचपन से 12-13 फीट की विशाल प्रतिमा बनाने का उनका सपना इस बार माता रानी की कृपा से पूरा हुआ है, जिससे उनका पूरा परिवार और क्षेत्र गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

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