Shahdol : मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के शहडोल मेडिकल कॉलेज में हुई लापरवाही से 12 गंभीर संक्रमितों (corona virus) के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। घटना के समय कुछ परिजन आईसीयू में मास्क दबा कर ऑक्सीजन देने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन मशीन से ऑक्सीजन ही नहीं आ रही थी। उन्होंने आंखों के सामने अपनों को दम तोड़ते देखा।
अनूपपुर जिले के कोतमा से कोरोना पॉजिटिव बड़े भाई का इलाज कराने रवि कुमार जायसवाल आए थे। उन्होंने कहा कि मेरे बड़े भाई 38 साल के थे। आईसीयू में इलाज करवा रहे थे। रिकवर हो गए थे। ऑक्सीजन पर थे। जब मैं रात को गया तो मशीन में ऑक्सीजन नहीं आ रही थी। मेरे सामने छटपटा रहे थे। कुछ ही देर बाद उनकी मौत हो गई। मैं कुछ भी नहीं कर पाया। मेरे सामने ही कई अन्य मरीज भी खत्म हो गए।
यह दर्द सिर्फ रवि कुमार जायसवाल का ही नहीं है। अपने परिजन की मौत पर फिरोज खान बदहवास हो गए। उन्होंने कहा कि 10 दिन से आईसीयू में भर्ती थे। रात 12 बजे अच्छे से खाना खिलाकर गए थे, वे आराम कर रहे थे। सुबह आईसीयू पहुंचे तो पता चला, नहीं रहे। गार्ड ने बताया ऑक्सीजन खत्म हो गई थी।
शहडोल के धनपुरी से प्रेम केवलानी अपने संक्रमित छोटे भाई कमल केवलानी के इलाज के लिए आए थे। उन्होंने बताया कि देर शाम ऑक्सीजन का लेवल देखा तो 91 प्रतिशत था। सुबह 4 बजे हल्ला को गया कि ऑक्सीजन खत्म होने से कई मौतें हो गई। तब किसी को अंदर जाने नहीं दे रहे थे। किसी तरह अंदर पहुंचा तो देखा कि छोटे भाई कमल केवलानी की बॉडी ठंडी थी। और एक नहीं कई बॉडी ऐसी ही थीं। पूरी लापरवाही शासन की है। छोटा भाई शनिवार रात 9 बजे बिल्कुल स्वस्थ था। आज हमारे बीच नहीं है।
अस्पताल में सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम के माध्यम से आईसीयू के 62, ऑक्सीजन सपोर्टेड 80 और 18 एलडीयू में ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है। मेडिकल कॉलेज में सभी बेड फुल हैं। सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम में सिलेंडर के माध्यम से ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई। इसमें ऑक्सीजन का प्रेशर कम हो गया। प्रेशर कम होने के बाद मरीजों को जरूरत के अनुसार ऑक्सीजन नहीं मिली और जान चली गई।
ऑक्सीजन की कमी के बाद कई मरीजों को ऑक्सीजन मास्क हाथ से दबाना पड़ा, मरीजों को लग रहा था कि शायद सही तरह से दबाने से ऑक्सीजन आ जाए। मामले में पहले मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ मिलिंद शिरालकर ने 6 मौतों की पुष्टि की। इसके थोड़ी देर बाद ही अपर कलेक्टर अर्पित वर्मा ने 12 मौतें होने की जानकारी दी।
इससे पहले 15 अप्रैल को जबलपुर में लिक्विड प्लांट में आई खराबी के कारण ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से 5 मरीजों की मौत हो गई थी। सभी वेंटिलेटर पर थे। वहीं 4 की हालत गंभीर हो गई थी। यहां के मेडिसिटी अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म होने से वेंटिलेटर पर 82 वर्षीय महिला की तड़प-तड़प कर जान चली गई थी। वहीं 4 की मौत सुख-सागर मेडिकल कॉलेज में हुई थी। इससे पहले शिवपुरी में भी ऐसा ही हुआ था।
डॉ मिलिंद शिरालकर का कहना है कि हमारे यहां 10 केएलडी क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट लगा है। इसमें शनिवार शाम से ही ऑक्सीजन कम होने लगा था। इसके लिए लिक्विड ऑक्सीजन पिलर मंगवाई गई थी। प्रशासन ने कहा कि शाम को आएगा। फिर बताया गया कि रात को आएगा। दो बजे तक नहीं आया। सिलेंडर के माध्यम से ऑक्सीजन दिया गया था। बताया जा रहा है कि दमोह में ऑक्सीजन लेकर आ रही गाड़ी घराब हो गई। जिसके चलते ऑक्सीजन देरी से अस्पताल पहुंच सकी जब तक 12 जाने जा चुकी थी।

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