April 19, 2026

News Prawah

UDYAM-MP-49-0001253

सिकलसेल जागरूकता के लिए क्षेत्र में जांच को बढ़ाया जाएं- महामहिम राज्यपाल मंगूभाई पटेल

खरगोन: मप्र के राज्यपाल मंगूभाई पटेल आज खरगोन जिले के एकदिवसीय दौरे पर आए थे। दौरे के दौरान उन्होंने सीएम शिवराजसिंह चौहान के साथ कार्यक्रमो में शिरकत की।

सिकलसेल की बीमारी अनुवांशिक एवं गंभीर बीमारी है जो माता-पिता में से बच्चे को होती है। अज्ञानता की वजह से कभी-कभी बच्चों की मृत्यु तक हो जाती है। अतः हम यह करे कि गर्भवती माता की स्वास्थ्य केन्द्रों पर अनिवार्य रूप से सिकलसेल की जांच करवाई जाये। अगर माता पॉजिटिव पाएं जाये तो उसकी विशेष काउंसलिंग कर उसे बताएं कि उनसे जन्म लेने वाले बच्चों का भी जन्म के साथ ही सिकलसेल की जांच अनिवार्य रूप से कराएं। अगर जन्म लेने वाला बच्चा भी पॉजिटिव आता है तो उसे विशेष खानपान एवं देखभाल की आवश्यकता रहती है। बचपन से ही उसका आयुर्वेद एवं होम्योपैथी में उपचार प्रारंभ किया जाए जिससे कि उसकी बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सके।

प्रदेश के महामहिम राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने उक्त बाते आज शुक्रवार को महेश्वर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित सिकलसेल से जुड़े अन्य डाक्टरों से कहीं। बैठक में जिले के प्रभारी मंत्री कमल पटेल, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती ज्योति शर्मा उपस्थित थे।

बैठक के दौरान राज्यपाल ने बताया कि आयुर्वेद में सिकलसेल बीमारी को जड़ से नष्ट करने का उपचार है। अतः क्षेत्र के मरीजों को आयुर्वेद की दवाईयां दी जाकर उनमें बीमारी को खत्म किया जाये। साथ ही हौम्योपैथी में भी सिकलसेल बीमारी का ईलाज है।

बैठक के दौरान राज्यपाल ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देशित किया कि जिले में सिकलसेल की जांच शासकीय अस्पतालों में तो अनिवार्य रूप से की जाये। उसके साथ ही छात्रावासों, आश्रमों में एवं आंगनवाड़ी में भी बच्चों की सिकलसेल की जांच की जाये। अगर बच्चे पॉजिटिव आते है तो उनके घर पर जाकर उनके माता-पिता का भी टेस्ट किया जाये। इससे यह होगा कि स्क्रीनिंग बढ़ेगी क्योंकि लोग तो संकोचवश जांच करवाने आते नहीं है। अज्ञानता के अभाव में जनजातीय क्षेत्रों में यह बिना बीमारी बहुत तेजी से पनप रही है। जिले के तीन विकास खंड खरगोन, भगवानपुरा एवं झिरन्या में भी सिकलसेल के अधिक मरीज है। अतः यहां पर जांच को बढ़ाकर लोगों को सिकलसेल के प्रति जागरूक करना होगा।

बैठक के दौरान राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने बताया कि प्रदेश के जनजाति बाहुल्य ग्रामों में पेसा एक्ट लागू है। पेसा एक्ट के ग्राम सभा में भी सिकलसेल बीमारी की जानकारी दी जा सकती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के कुछ ग्रामों में पेसा एक्ट के तहत आयोजित ग्राम सभा में यह प्रस्ताव पारित किया गया है कि ग्राम में शादी करने से पहले लड़का लड़की का कार्ड मेच किया जाएगा। अगर दोनों के येलोकार्ड है तो शादी नहीं की जाए। क्योंकि अगर लड़का और लड़की दोनों पॉजिटिव है तो उनकी संतान भी सिकलसेल पॉजिटिव होगी। अतः सिकलसेल की जागरूकता करके हम प्रदेश के ऐसे ग्राम जहां पर पेसा एक्ट लागू है वहां पर भी इस तरह का प्रस्ताव पास करके सिकलसेल की बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है।

Share to...