भोपाल। प्रदेश में शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत के साथ ही सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की चहल-पहल लौट आई है। विद्यार्थी नए गणवेश में स्कूल पहुंच रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इस बार भी लाखों विद्यार्थियों को समय पर सिली-सिलाई गणवेश नहीं मिल पाएगा। पहली से आठवीं कक्षा तक के लगभग 52 लाख विद्यार्थी अक्टूबर या नवंबर तक गणवेश के लिए इंतजार करने को मजबूर होंगे।
🔄 प्रक्रिया में बदलाव और टेंडर की चुनौती
इस वर्ष शासन ने गणवेश वितरण की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। विद्यार्थियों के खातों में सीधे राशि भेजने के बजाय, अब सीधे सिली-सिलाई गणवेश उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम को सौंपी गई है। निगम के महाप्रबंधक संजीव त्यागी के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया अभी अंतिम चरण में है, लेकिन टेंडर स्वीकृति, उत्पादन और परिवहन में लगने वाले समय के चलते वितरण में देरी निश्चित है।
📏 1.40 करोड़ गणवेश का लक्ष्य और बजट
प्रदेश के 52 लाख विद्यार्थियों के लिए कुल 1.40 करोड़ गणवेश (दो-दो सेट प्रति विद्यार्थी) तैयार किए जाने हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना पर सरकार लगभग 350 करोड़ रुपये खर्च करेगी। निगम ने वेंडरों से छह जुलाई तक कपड़ों के नमूने और लैब रिपोर्ट मांगी है, जिसके बाद सात जुलाई को टेंडर खोले जाने का प्रस्ताव है। अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में गणवेश तैयार करने में लगने वाला समय ही देरी का मुख्य कारण है।
📉 पुरानी शिकायतों से सबक
गौरतलब है कि दो वर्ष पूर्व भी सरकार ने सिली-सिलाई ड्रेस वितरण का प्रयास किया था, लेकिन तब गुणवत्ता और नाप को लेकर काफी शिकायतें मिली थीं। इसके चलते पिछले साल सरकार ने विद्यार्थियों के खातों में 600 रुपये की राशि भेजी थी। इस बार फिर से सिली-सिलाई ड्रेस की व्यवस्था को चुनौती के रूप में लिया गया है, जिसे समय पर पूरा करना पाठ्य पुस्तक निगम के लिए एक बड़ी परीक्षा है।

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