नईदिल्ली:भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश के सभी बैंकों या एनबीएफसी के कामकाजों पर नजर रखती है। जब भी कोई बैंक आरबीआई के नियमों को अनदेखा कर अपनी मनमानी करता है तो केंद्रीय बैंक उस पर जुर्माना लगा सकता है। इसी कड़ी में आरबीआई ने मुंबई स्थित सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक और उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ स्थित नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर रेस्ट्रिक्शन लगा दिए हैं।
आरबीआई ने सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक की बिगड़ती वित्तीय स्थिति के मद्देनजर उसपर कई अंकुश लगाए। इसमें ग्राहकों पर अपने खातों से निकासी की सीमा 15,000 रुपये लगाई गई है। एलिजिबल डिपॉजिटर्स, केवल डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) से अपनी जमा राशि की 5 लाख रुपये तक की जमा बीमा दावा राशि प्राप्त करने के हकदार होंगे। बैंक पर बैंकिंग रेगुलेशंस एक्ट, 1949 की धारा 35ए के तहत निर्देशों के रूप में अंकुश सोमवार (15 अप्रैल, 2024) को कारोबार की समाप्ति से लागू हो गए हैं। रिजर्व बैंक ने यह भी कहा कि जारी दिशानिर्देशों को रिजर्व बैंक द्वारा बैंकिंग लाइसेंस रद्द करने के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।
नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर RBI का एक्शन
आरबीआई ने सोमवार (15 अप्रैल) को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ स्थित नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की खराब होती वित्तीय स्थिति को देखते हुए उस पर कई अंकुश लगा दिए जिनमें खातों से 10,000 रुपये की निकासी की सीमा भी शामिल है। आरबीआई ने एक बयान में कहा कि को-ऑपरेटिव बैंक पर बंदिशें लगने के बाद एलिजिबल डिपॉजिटर्स, डीआईसीजीसी से 5 लाख रुपये तक अपनी जमा राशि का दावा करने के हकदार होंगे. केंद्रीय बैंक ने कहा कि इस को-ऑपरेटिव पर बैंकिंग रेगुलेशंस एक्ट, 1949 की धारा 35 ए के तहत प्रतिबंध 15 अप्रैल, 2024 को कारोबार की समाप्ति से लागू होते हैं।
आरबीआई ने कहा कि ये बंदिशें 15 अप्रैल, 2024 को कारोबार बंद होने से 6 महीने तक लागू रहेंगी और समीक्षा के अधीन रहेंगी।

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