October 16, 2026

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MP Religion & Astrology: नवरात्रि से शुरू होती है श्रीयंत्रों की बुकिंग, जानिए शुद्धता और सही मेजरमेंट का वैज्ञानिक कारण

नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदांचल (नर्मदापुरम) में निर्मित श्रीयंत्रों की शुद्धता और सटीक माप (मेजरमेंट) के कारण देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी इनकी मांग तेजी से बढ़ी है। सोने, चांदी, तांबे और त्रिधातु से बनने वाले इन श्रीयंत्रों की निर्माण प्रक्रिया में शुद्धता और धार्मिक नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है। पुष्य नक्षत्र और अन्य शुभ मुहूर्तों में विशेष मंत्रोच्चार व पूजन-अर्चन के बाद ही इन्हें यजमानों को सौंपा जाता है। श्रीविद्या के जानकार और ज्योतिषाचार्य विशाल महाजन के अनुसार श्रीयंत्र भगवान शिव और आदिशक्ति का संयुक्त स्वरूप है, जिसकी साधना से व्यक्ति को भोग (सांसारिक सुख) और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।

🕉️ नवरात्रि से पहले आते हैं ऑर्डर, दीपावली और चैत्र नवरात्रि में होती है डिलीवरी

ज्योतिषाचार्य विशाल महाजन ने बताया कि इन विशेष श्रीयंत्रों का निर्माण स्वयं ढलाई (कास्टिंग वर्क) और फिनिशिंग करके किया जाता है। इनके ऑर्डर शारदीय नवरात्रि के पहले से ही आने शुरू हो जाते हैं, जिन्हें दीपावली के शुभ मुहूर्त से पूर्व यजमानों तक पहुँचाया जाता है। नवरात्रि के बाद मिलने वाले ऑर्डर्स की डिलीवरी अगले वर्ष चैत्र नवरात्रि के दौरान ही संभव हो पाती है। जो विदेशी यजमान व्यक्तिगत रूप से भारत नहीं आ पाते, उन्हें कूरियर के माध्यम से सुरक्षित तरीके से श्रीयंत्र भेजे जाते हैं।

📐 सही मेजरमेंट और धातु की आयु का महत्व: तांबे की 50 तो सोने की होती है कई पीढ़ियों तक उम्र

विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में मिलने वाले सामान्य श्रीयंत्रों की तुलना में इनके त्रिकोण और मेजरमेंट पर विशेष ध्यान दिया जाता है, क्योंकि गलत माप नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है। शास्त्रों के अनुसार भोजपत्र पर बने श्रीयंत्र की आयु 10-15 वर्ष, तांबे के श्रीयंत्र की 50 वर्ष, चांदी की 100 वर्ष और सोने के श्रीयंत्र की आयु कई पीढ़ियों तक मानी गई है। साईं काका एवं प्रह्लाद गिरी महाराज के मार्गदर्शन में प्राप्त इस प्राचीन विद्या के आधार पर ही विशेष त्रिधातु संयोजन से इन सिद्ध श्रीयंत्रों का निर्माण किया जा रहा है।

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