-ईशा शर्मा
राम
करते थे वो कटु व्यंग हमे, हम गाते ही रह जायेंगे
कहते है मंदिर वही बनाएंगे, पर तारीख नही बताएंगे
लो सुनो गौर से मत कहना तारीख नही बतलाई है
वर्षों की कड़ी प्रतीक्षा के बाद शुभ घड़ी आई है
दिन सोमवार का तय हुआ, बाइस जनवरी बतलाया है।
सकल देश के घर घर में अक्षत, आमंत्रण पहुंचाया हैI
जो कसम राम की खाई थी हम मंदिर वही बनाएंगे
वो कसम राम ने पूरी की अब मंदिर वही बनाया है
दरबार सजा अब महलों में, घर घर भगवा लहराया है
लो हुई अवध में दीवाली, वो राम राज फिर आया है।
मात्र कल्पना है श्रीराम, कहते थे विरोधी एकझूंड
आहुति कार सेवकों की थी, चढ़ी राम नाम के यज्ञकुंड
लो बलिदानों को मूल्य मिला, परिणाम त्याग का पाया है।
तंबू से कर वनवास पूर्ण, महलों में लाला आया है।
वो कसम राम ने पूरी की अब मंदिर वही बनाया है
लो हुई अवध में दीवाली, वो राम राज फिर आया है।
जनमानस विश्वास आस्था पर तुमने आघात किया।
हम रामप्रेमियों का केवल फिर मोदी जी ने साथ दिया।
वो राम को लेकर आए है, जनमानस उनको लाया है।
बस इसीलिए उस रामभक्त को शासन पर बैठाया है।
लो हुई अवध में दीवाली, वो राम राज फिर आया है।
॥जय श्री राम ।।

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