August 21, 2026

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Raksha Sutra Puranik Katha Rakshabandhan: रक्षा सूत्र बांधने से मिलता है भगवान का संरक्षण, जानें राजा बलि और माता लक्ष्मी की कथा

रक्षाबंधन हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार है. सनातन धर्म में रक्षा सूत्र का विशेष महत्व माना गया है. इस साल यह त्योहार 28 अगस्त यानी शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा. पौराणिक कथाओं के अनुसार, रक्षा सूत्र केवल एक धागा नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा और प्रेम का बहुत बड़ा प्रतीक माना जाता है. आज के समय में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सुरक्षा की कामना करती हैं. यह त्योहार हमें अपने पौराणिक इतिहास और धार्मिक मूल्यों से जोड़ता है. प्राचीन काल से चली आ रही इस रक्षा सूत्र की परंपरा का पालन करने से भाई और बहन के बीच का संबंध और गहरा बनता है. सही भाव और नियम से त्यौहार मनाने से घर-परिवार में पवित्रता का वास होता है.

भगवान कृष्ण और द्रौपदी की पावन कथा

रक्षाबंधन के इस पावन त्योहार से जुड़ी कथाओं में से एक महाकाव्य महाभारत से उत्पन्न होती है. पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान कृष्ण की उंगली सुदर्शन चक्र से गलती से कट गई थी. यह देखकर द्रौपदी ने खून रोकने के लिए अपनी साड़ी से कपड़े का एक टुकड़ा फाड़कर चोट पर बांध दिया. भगवान कृष्ण उनके इस हाव-भाव से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने हमेशा उनकी रक्षा करने का वादा किया. उन्होंने यह वादा तब पूरा किया जब द्रौपदी को हस्तिनापुर के शाही दरबार में अपमान का सामना करना पड़ा. भगवान कृष्ण ने द्रौपदी के चीरहरण के समय उनकी लाज बचाकर अपना वचन निभाया था. यह कथा हमें सिखाती है कि रक्षा सूत्र का भाव सच्चा हो, तो ईश्वर स्वयं रक्षा करने के लिए उपस्थित हो जाते हैं.

राजा बलि और माता लक्ष्मी की पौराणिक कथा

राखी से जुड़ी राजा बलि और माता लक्ष्मी की कथा विष्णु पुराण में मिलती है. विष्णु पुराण के अनुसार जब भगवान विष्णु ने अपने वामन अवतार में राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी और उनका सारा राज्य ले लिया, तब बलि ने भगवान विष्णु को अपने साथ रहने का अनुरोध किया. भगवान विष्णु राजा बलि के पास ही रहने लगे. तब माता लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांधकर उन्हें अपना भाई बनाया और उपहार स्वरूप श्री हरि विष्णु भगवान को वापस वैकुंठ ले गईं. इस प्रकार माता लक्ष्मी ने रक्षा सूत्र बांधकर भगवान विष्णु को पुनः प्राप्त किया. यह कथा बताती है कि रक्षा सूत्र में कितनी अपार शक्ति और पवित्रता छुपी हुई है. इस परंपरा का पालन आज भी पूरे निष्ठा और भाव के साथ किया जाता है.

कालांतर में त्यौहार का बदला स्वरूप और महत्व

समय के साथ कालांतर में यह त्योहार भाई-बहनों का त्योहार बन गया. प्राचीन काल में जहां यह विजय और सुरक्षा के लिए बांधा जाता था, वहीं आज के समय में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सुरक्षा की कामना करती हैं. भाई भी अपनी बहनों को हर संकट से बचाने का वचन देते हैं. रक्षा सूत्र बांधने की यह परंपरा परिवार में आपसी प्रेम को मजबूत करती है. सनातन धर्म में रक्षा सूत्र का महत्व केवल एक नियम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर व्यक्ति को अपने कर्तव्य की याद दिलाता है. इस पावन अवसर पर भाई की कलाई पर राखी सजाने से मन में प्रसन्नता आती है. यह त्यौहार प्राणी मात्र के प्रति सम्मान और प्रेम के भाव को बढ़ावा देता है.

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