April 18, 2026

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राज्यसभा सांसद सोलंकी ने रेल मंत्री से वार्षिक रेल बजट में जनजातीय बहुल क्षेत्रो में किन किन जगह नई रेल लाइने बिछाने का प्रस्ताव व इंदौर मनमाड रेल लाइन व बोगियों में कैमरे लगाने की लेकर किया सवाल

भाजपा से राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने संसद के बजट सत्र में देश के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में नवीन रेलवे लाइन व बहुचर्चित इंदौर-मनमाड रेल परियोजना और सुरक्षा की दृष्टि से भविष्य में रेलवे बोगियों में कैमरे लगाने के सम्बंध में किया सवाल रेल मंत्री से सवाल किया।

सांसद डॉ. सोलंकी ने पूछा कि वार्षिक रेल बजट 2023-24 जनजातीय बहुल क्षेत्रों में किन-किन स्थानों पर नई रेल लाइनें बिछाने का प्रस्ताव किया गया है,साथ ही क्या इस आवंटित बजट में इंदौर-मनमाड रेल परियोजना भी पूरी की जाएगी।

राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी के सवाल का जवाब देते हुए रेल मंत्री भारत सरकार अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेल मंत्रालय ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गाड़ियों के सवारी डिब्बों में दरवाजे के पास सीसीटीवी कैमरे संस्थापित करने के लिए कदम उठाए हैं।
वर्तमान में 6600 से अधिक सवारी डिब्बों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा सभी यात्री सवारी डिब्बों में चरणबद्ध तरीके से कैमरे संस्थापित किये जाने की योजना है।

जनजातीय बहुल क्षेत्रों में नई लाइनें बिछाने के लिए रेल परियोजनाओं के सम्बंध में रेलवे बोर्ड, जोनल रेलवे, मंडल कार्यालय आदि सहित विभिन्न स्तरों पर रेलवे द्वारा राज्य सरकारों, केंद्र सरकार के मंत्रालयों, जनप्रतिनिधियों, संगठनों/रेल उपयोगकर्ताओं आदि से औपचारिक एवं अनोपचारिक दोनों प्रस्ताव/सुझाव प्राप्त होते है।

नई लाइन परियोजनाओं को चालू परियोजनाओं के थ्रो-फॉरवर्ड निधियों की समग्र उपलब्धता और प्रतिस्पर्धी मांगो पर आधारित लाभप्रदता, अंतिम मिल सम्पर्कता, मिसिंग लिंको और वैकल्पिक मार्गो, भीड़भाड़ वाली/संतृप्त लाइनों में बढ़ोतरी, सामाजिक-आर्थिक मुद्दों आदि के आधार पर शुरू किया जाता है।
आगामी वर्षों में इन क्षेत्रों में रेल अवसरंचना में बढ़ोतरी करने और ऐसे क्षेत्रों में रेल सम्पर्कता को बढ़ावा देने के लिए वित्त वर्ष 2023-24 के लिए बजट में 70 हजार करोड़ रुपए की लागत पर “जनजातीय गौरव कॉरिडोर” के रूप में नई लाइन के अम्ब्रेला कार्य का प्रस्ताव किया गया है।

रेल परियोजनाओं की लागत व्यय और परिव्यय सहित जोन-वार ब्यौरा भारतीय रेल की वेबसाइट ओर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया गया है।

2014 के बाद से भारतीय रेल में नई लाइन, आमान परिवर्तन और दोहरीकरण परियोजनाओं के लिए निधि आबंटन में पर्याप्त वृद्धि हुई है और तदनुरूप परियोजनाओं की कमीशनिंग हुई है। 2024-19 के दौरान भारतीय रेल की नई लाइन, आमान परिवर्तन और दोहरीकरण परियोजनाओं के लिए औसत वार्षिक बजट आंवटन को 2009-14 के दौरान 11,527 करोड़ रु प्रति वर्ष से बढ़ाकर 26,026 करोड़ रु प्रति वर्ष कर दिया गया है।

इंदौर-मनमाड़ (358 किमी) नई लाइन परियोजना को आवश्यक सरकारी अनुमदनो के अध्यधीन 2016-17 के रेल बजट में शामिल किया गया था। जुलाई 2017 में परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई थी। डीपीआर के अनुसार इस परियोजना की लागत 8857.97 करोड़ रु आंकी गयी थी।
पूर्व में रेल मंत्रालय द्वारा रेल मंत्रालय की भागीदारी नीति के संयुक्त उद्दयम मॉडल के तहत परियोजना के कार्यान्वयन हेतु एक प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी थी। तदनुसार इस परियोजना को शुरू करने के लिए एक संयुक्त उद्दयम कम्पनी की स्थापना करने के लिए इंडियन पोर्ट रेलवे कारपोरेशन लिमिटेड के साथ निष्पादन एजेंसी के रूप में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट तथा मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र राज्य सरकार के बीच समझौता पर हस्ताक्षर किए गए है।

इसके पश्चात अन्य परियोजनाओं में निवेश करने के लिए जेएनपिटी की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए उक्त परियोजना में निवेश को आस्थगित करने का निर्णय लिया गया है। तदनुसार रेल परियोजना के रूप में इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की जांच शुरू की गई है।

रेल परियोजनाओ का समय पर पूरा होना विभिन्न कारकों जैसे राज्य सरकार द्वारा शीघ्र भूमि अधिग्रहण, वन विभाग के पदाधिकारियों, द्वारा वन सम्बंधी मंजूरी, सम्बंधित विभागों, राज्य सरकारों/मंत्रालयों से क्लियरेंस, लागत वहन परियोजनाओं में राज्य सरकार द्वारा लागत वहन की राशि जमा कराने, बाधक जनोपयोगी सेवाओ की शिफ्टिंग, विभिन्न प्राधिकरणों से सांविधिक स्वीकृतियां क्षेत्र की भूवैज्ञानिक और स्थलाकृतिक परिस्थितियों, परियोजना स्थल के क्षेत्र में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति, जलवायु परिस्थितियों के कारण विशेष परियोजना स्थल के समाधान इत्यादि पर निर्भर करता है। ये सभी कारक परियोजना के समापन समय और लागत को प्रभावित करते है।

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