उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध कालभैरव मंदिर में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने नई दर्शन व्यवस्था लागू की है। अब श्रद्धालु ₹500 शुल्क देकर बाबा कालभैरव के गर्भगृह में सीधे प्रवेश कर शीघ्र दर्शन और पूजन कर सकेंगे। वहीं सामान्य श्रद्धालुओं के लिए पहले की तरह निशुल्क कतारबद्ध दर्शन व्यवस्था जारी रहेगी।
इस संबंध में एसडीएम एल एन गर्ग ने जानकारी देते हुए बताया कि बाबा कालभैरव को भगवान महाकाल के कोतवाल और सेनापति के रूप में पूजा जाता है। मंदिर में प्रतिदिन 20 से 25 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि विशेष पर्वों पर यह संख्या एक लाख तक पहुंच जाती है। ऐसे में लंबे समय से श्रद्धालुओं की मांग थी कि शीघ्र दर्शन की अलग व्यवस्था बनाई जाए।
नई व्यवस्था के तहत ₹500 की रसीद कटवाने वाले श्रद्धालुओं को सीधे गर्भगृह तक ले जाया जाएगा, जहां विधिवत पूजन-अर्चन के बाद दर्शन कराए जाएंगे। प्रशासन के अनुसार भीड़ की स्थिति के आधार पर ऐसे श्रद्धालुओं को 5 से 15 मिनट के भीतर दर्शन कराए जाएंगे। वहीं सामान्य श्रद्धालु पहले की तरह लाइन में लगकर निशुल्क दर्शन करते रहेंगे।
प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल सुविधा बढ़ाना ही नहीं, बल्कि मंदिर परिसर में सक्रिय बिचौलियों पर रोक लगाना भी है। अधिकारियों के मुताबिक कुछ शिकायतें मिल रही थीं कि प्रोटोकॉल और विशेष प्रवेश के नाम पर कुछ लोग श्रद्धालुओं से पैसे लेकर दर्शन करा रहे थे। अब अधिकृत रसीद व्यवस्था लागू होने से श्रद्धालुओं को पारदर्शिता मिलेगी और अवैध वसूली पर भी लगाम लगेगी।
मंदिर प्रशासन का मानना है कि नई व्यवस्था से श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन मिलेंगे और मंदिर की आय में भी वृद्धि होगी, जिससे भविष्य में मंदिर की व्यवस्थाओं और विकास कार्यों को और बेहतर बनाया जा सकेगा।

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