वाराणसी: प्रधानमंत्री मोदी ने आज सोमवार को वाराणसी में दुनिया के सबसे बड़े ध्यान केंद्र ‘स्वर्वेद महामंदिर’ का उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ इस केंद्र का दौरा किया। यहां 20,000 से अधिक लोग एक साथ बैठकर ध्यान कर सकते हैं।
सात मंजिला इस भव्य महामंदिर की दीवारों पर स्वर्वेद के छंद उकेरे गए हैं। इस दौरान पीएम मोदी ने लोगों के सामने 9 संकल्प, 9 आग्रह रखें।
ये हैं पीएम मोदी के 9 संकल्प, 9 आग्रह:
1- पानी की बूंद-बूंद बचाइए और जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करिए।
2 – गांव-गांव जाकर लोगों को डिजिटल लेन देन के प्रति जागरूक करिए।
3 – अपने गांव, शहर, मोहल्ले को स्वच्छता में नंबर 1 बनाने के लिए काम करिए।
4 – जितना हो सके आप लोकल को, स्थानीय प्रोडक्ट को प्रमोट करिए, मेड इन इंडिया उत्पादों का ही प्रयोग कीजिए।
5 – जितना हो सके, पहले अपने देश को देखिए, अपने देश में घूमिए।
6 – प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक करिए।
7 – मिलेट्स यानी श्री अन्न को अपने जीवन में शामिल करिए, इसका खूब प्रचार-प्रसार करिए।
8 – फिटनेस योग हो, स्पोर्ट्स हो, उसे भी अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाइए।
9 – कम से कम एक गरीब परिवार का संबल बनिए, उसकी मदद कीजिए। ये भारत में गरीबी दूर करने के लिए जरूरी है।
विदित हो कि स्वर्वेद महामंदिर प्राचीन दर्शन, आध्यात्मिकता और आधुनिक वास्तुकला का एक मिलाजुला रूप है। इसके उद्घाटन के साथ ही अब इसके एक प्रमुख पर्यटक केंद्र के रूप में उभरने की संभावना है। यहां एक साथ बैठकर 20 हजार लोग ध्यान कर सकते हैं। इसकी भव्यता देखते ही बनती है।
स्वर्वेद महामंदिर के निर्माण कार्य की शुरुआत साल 2004 में हुई थी। सात मंजिला स्वर्वेद महामंदिर 68,000 वर्ग फुट में फैला हुआ है और यह शिल्प और अत्याधुनिक तकनीक के अद्भुत सामंजस्य का प्रतीक है। यह एक आध्यात्मिक मंदिर है जो स्वर्वेद को समर्पित है, एक आध्यात्मिक पाठ जिसमें सात मंजिलें हैं जो मूल रूप से 7 चक्रों को समर्पित हैं। स्वर्वेद महामंदिर को कमल के फूल जैसा स्वरूप दिया गया है।
स्वर्वेद मंदिर का नाम स्व: और वेद से जुड़कर बना है. स्व: का एक अर्थ है आत्मा, वेद का अर्थ है ज्ञान। जिसके द्वारा आत्मा का ज्ञान प्राप्त किया जाता है, जिसके द्वारा स्वयं का ज्ञान प्राप्त किया जाता है, उसे ही स्वर्वेद कहते हैं।
इस मंदिर की दीवारों पर 4000 वेदों से जुड़े दोहे भी लिखे गए हैं। साथ ही मंदिर की बाहरी दीवारों पर उपनिषद, महाभारत, रामायण, गीता आदि से जुड़े चित्र बनाए गए हैं जिससे लोग कुछ प्रेरणा लें सकें।

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