ग्वालियर। सिंधिया राज परिवार की बहुचर्चित संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रहे समझौते के विवाद में एक नया और अहम मोड़ आ गया है। समझौता प्रतिवेदन पर कोर्ट में धोखाधड़ी के आधार पर आपत्ति दर्ज कराने वाली ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्मराजे राणा की बेटी प्रतिमा देवी के मामले में ग्वालियर कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं के खिलाफ कोर्ट में धोखाधड़ी के सबूत पेश करने के निर्देश दिए हैं।
📝 प्रतिमा देवी का आरोप: ‘धोखे से लिए गए थे सहमति पत्र पर हस्ताक्षर’
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच 40 हजार करोड़ रुपये की राजपरिवार संपत्ति के बंटवारे का यह विवाद आपसी समझौते की ओर बढ़ रहा था, तभी कोर्ट में नए दावेदार की आपत्ति के बाद मामला उलझ गया। प्रतिमा देवी ने अपनी मां के अधिकार और हिस्सेदारी का दावा करते हुए आरोप लगाया था कि समझौते के लिए पूर्व में सहमति पत्र पर उनकी मां के हस्ताक्षर धोखे से लिए गए थे। पिछली 7 अक्टूबर को इस मामले पर लंबी बहस हुई थी, जिसमें बुआओं (उषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोदा राजे सिंधिया) की ओर से इन सभी आरोपों को निराधार बताया गया था।
⚖️ अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को: साबित करना होगा धोखाधड़ी का आरोप
बुधवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आत्मा राम टोंक ने अपना आदेश सुनाया। कोर्ट ने प्रतिमा देवी को आगामी सुनवाई में गवाही देने और यह साबित करने के लिए साक्ष्य पेश करने को कहा है कि हस्ताक्षर वास्तव में धोखाधड़ी से कराए गए थे। वहीं, सिंधिया पक्ष की ओर से आपसी राजीनामा होने का पक्ष रखा जाएगा। इस केस से जुड़े अधिवक्ता ने बताया कि मामले की अगली सुनवाई अब आगामी 29 अक्टूबर को होगी।

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