मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से पर्यावरण और जलस्रोतों की रक्षा को लेकर एक बड़ी और गंभीर खबर सामने आई है। शहर के बाणगंगा और एक अन्य नाले के जरिए आने वाला लगभग 8 एमएलडी (MLD) सीवेज का गंदा पानी अभी भी बिना किसी शोधन (ट्रीटमेंट) के सीधे छोटे तालाब में मिल रहा है। इस बात का खुलासा खुद नगर निगम द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के समक्ष पेश की गई आधिकारिक रिपोर्ट में हुआ है। इस गंभीर लापरवाही का संज्ञान लेते हुए एनजीटी के निर्देशों के आधार पर मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने 31 मार्च से 31 दिसंबर 2027 तक की कुल 21 महीनों की अवधि के लिए 2.10 करोड़ रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (एनवायरनमेंटल कंपनसेशन) का आकलन किया है। इसके चलते नगर निगम पर जल्द ही इस जुर्माने की गाज गिर सकती है, हालांकि यह राशि एनजीटी द्वारा अभी अंतिम रूप से तय नहीं की गई है।
🔍 एनजीटी में पेश रिपोर्ट का खुलासा: 37 नाले डायवर्ट, लेकिन बाणगंगा और पुराने मछलीघर से अब भी गिर रहा गंदा पानी
एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच में याचिकाकर्ता राशिद नूर खान की तरफ से दायर याचिका पर चल रही सुनवाई के दौरान यह रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट के अनुसार, छोटे तालाब में पहले से चिन्हित किए गए कुल 37 नालों को आपस में इंटरसेप्ट कर एसटीपी (STP) की ओर डायवर्ट किया जा चुका है। इसके बावजूद बाणगंगा नाले से 6 एमएलडी और पुराने मछलीघर के पास से लगभग 2 एमएलडी सीवेज बिना साफ हुए सीधे तालाब में समा रहा है। इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए एनजीटी ने नगर निगम को ताकीद किया है कि वह वेटलैंड की सुरक्षा पुख्ता करे, जलस्रोतों में अनुपचारित पानी की निकासी पर तुरंत रोक लगाए और वेटलैंड क्षेत्र में किए गए सभी अनधिकृत निर्माणों को हटाकर 15 दिनों के भीतर अपनी एक्शन रिपोर्ट पेश करे। इस मामले की अगली और अहम सुनवाई अब 15 अक्टूबर को होगी।
⚙️ सीवेज के स्थायी समाधान के लिए 10 एमएलडी क्षमता के नए एसटीपी का निर्माण कार्य शुरू
नगर निगम ने ट्रिब्यूनल को जानकारी दी है कि इन दोनों नालों से आने वाले सीवेज के स्थायी और वैज्ञानिक उपचार के लिए 10 एमएलडी की क्षमता वाले नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इस प्लांट का काम 11 सितंबर 2026 को आरंभ हुआ है और इसे निर्धारित समय सीमा यानी 31 दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि तालाब को पूरी तरह प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
🌳 प्रोफेसर कॉलोनी और सिविल लाइंस में पेड़ों को जहरीला करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
सुनवाई के दौरान एनजीटी ने प्रोफेसर कॉलोनी और सिविल लाइंस क्षेत्र में कुछ लोगों द्वारा खतरनाक रसायनों (केमिकल) का इस्तेमाल करके हरे-भरे पेड़ों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने और सुखाने के मामलों पर भी कड़ी नाराजगी जताई है। अधिकरण ने वन विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आगामी सुनवाई से पहले ऐसे लापरवाह और दोषियों के खिलाफ आवश्यक व कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा, इस पूरे मामले में अब लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव को भी एक पक्षकार के रूप में जोड़ा गया है।

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