September 29, 2026

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NEET UG and CUET UG News: शिक्षा मंत्रालय का बड़ा प्रस्ताव, साल में दो बार हो सकती हैं परीक्षाएं—घटेगा कोचिंग का दबाव

NEET-UG और CUET-UG की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए परीक्षा व्यवस्था में बदलाव हो सकता है. शिक्षा मंत्रालय ने बड़ी प्रवेश परीक्षाओं को साल में कम से कम दो बार आयोजित करने का प्रस्ताव तैयार किया है. फिलहाल जेईई मेन साल में दो बार होती है, जबकि नीट यूजी और सीयूईटी यूजी आमतौर पर साल में एक बार आयोजित की जाती हैं. प्रस्ताव का उद्देश्य छात्रों पर एक ही परीक्षा का दबाव कम करना और प्राइवेट कोचिंग संस्थानों पर उनकी निर्भरता घटाना है. इसके अलावा स्कूलों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को मजबूत करने के लिए टिचर्स की विशेष ट्रेनिंग का भी सुझाव दिया गया है.

बड़ी प्रवेश परीक्षाएं दो बार कराने का सुझाव

शिक्षा मंत्रालय ने जून 2025 में कोचिंग संस्थानों पर छात्रों की निर्भरता कम करने के उपायों पर विचार के लिए नौ सदस्यीय समिति बनाई थी. समिति ने अपनी सिफारिशों में NEET और CUET जैसी बड़ी प्रवेश परीक्षाओं को साल में कम से कम दो बार आयोजित करने का सुझाव दिया है. इस व्यवस्था से छात्रों को परीक्षा में दो मौके मिल सकते हैं. इससे एक ही प्रयास पर निर्भरता कम होगी और परीक्षा से जुड़ा दबाव भी घट सकता है. हालांकि, यह प्रस्ताव अभी ड्राफ्ट स्तर पर है.

प्रश्न पत्र के कठिनाई स्तर की होगी समीक्षा

समिति ने प्रवेश परीक्षाओं के प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया की समीक्षा की भी सिफारिश की है. कई बार छात्रों और अभिभावकों की ओर से सवाल उठते रहे हैं कि कुछ प्रश्न निर्धारित सिलेबस की तुलना में ज्यादा कठिन होते हैं. प्रस्ताव में प्रश्नों का कठिनाई लेवल छात्रों की कक्षा और सिलेबस के अनुरूप रखने पर जोर दिया गया है.

राज्य बोर्ड के सिलेबस पर भी ध्यान

ड्राफ्ट में यह सुझाव भी दिया गया है कि प्रवेश परीक्षाओं के प्रश्न केवल NCERT सिलेबस तक सीमित नहीं होने चाहिए. अलग-अलग राज्यों और स्कूल बोर्डों में पढ़ाए जाने वाले सिलेबस को भी ध्यान में रखा जाए. इसका उद्देश्य अलग-अलग बोर्ड से आने वाले छात्रों को परीक्षा में समान अवसर देना है.

स्कूल टीचर्स को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग

शिक्षा मंत्रालय ने स्कूल टिचर्स के लिए स्पेशल ट्रेनिंग का प्रस्ताव भी रखा है. इसके जरिए टीचर्स छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की जरूरत के अनुसार गाइडेंस दे सकेंगे. इससे स्कूल लेवल पर ही छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सहायता मिलने और प्राइवेट कोचिंग पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है. हालांकि, इन बदलावों को लागू करने से पहले सरकार की अंतिम मंजूरी जरूरी होगी.

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