छिंदवाड़ा । छिंदवाड़ा शहर में पेयजल का संकट गहराता जा रहा है और आमजन बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज हैं। स्थिति यह है कि लोगों को महीने में महज 10 से 15 दिन ही पानी की सप्लाई मिल पा रही है। विडंबना यह है कि नगर निगम पर्याप्त पानी देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है, लेकिन नागरिकों से पूरे महीने का जलकर (Water Tax) वसूला जा रहा है। स्थानीय पार्षदों और नगर निगम दफ्तर में सुनवाई न होने से निराश शहरवासियों का गुस्सा अब सीएम हेल्पलाइन (181) पर फूट पड़ा है। अकेले अक्टूबर महीने में ही पानी संकट को लेकर 271 शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं।
🌧️ बारिश की कमी और सिस्टम की नाकामी से पूरा शहर परेशान
शहरवासियों का कहना है कि जल संकट को लेकर वे लंबे समय से परेशान हैं। जब नगर निगम में कोई तवज्जो नहीं मिली, तो लाचार होकर वे 181 पर कॉल कर सीधे मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
- दावों की खुली पोल: जहाँ नगर निगम अधिकारी दावा कर रहे हैं कि एक दिन के अंतराल पर पानी दिया जा रहा है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि लोगों को लगातार 3-3 दिनों तक पानी नसीब नहीं हो रहा है।
- अधिकारियों की लाचारी: स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने भी शिकायतों के समाधान में एक तरह से अपने हाथ खड़े कर दिए हैं।
🚜 संकट से निपटने की तैयारी: 50 नए बोरवेल का प्रस्ताव और नारंगी डैम से पानी लाने का प्लान
पेयजल व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोशिशों का दावा किया जा रहा है:
- महापौर विक्रम अहिके का बयान: “जल संकट का समाधान निकालने के लिए नारंगी डैम का निरीक्षण किया गया है। डैम का पानी कुलबहरा नदी तक लाने की प्लानिंग बनाई जा रही है। इसके साथ ही आपात स्थिति से निपटने के लिए शहर में 50 नए बोरवेल खनन कराने का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है।”
- कमिश्नर चंद्र प्रकाश राय की सफाई: “सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों का निरंतर समाधान किया जा रहा है। पानी वितरण में जो तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं, उनकी रोजाना समीक्षा कर व्यवस्था दुरुस्त की जा रही है।”
🏗️ नगर निगम के सामने खड़ी मुख्य तकनीकी चुनौतियाँ
छिंदवाड़ा नगर निगम के पास जल आपूर्ति सुचारू न हो पाने के पीछे कई बड़ी वजहें हैं:
- पानी की भारी किल्लत: पूरे 48 वार्डों में नियमित सप्लाई के लिए प्रतिदिन 49 एमएलडी (MLD) पानी की जरूरत है, लेकिन निगम माचागोरा डैम से सिर्फ 20 एमएलडी पानी ही ले पा रहा है।
- ग्रामीण वार्डों में बदहाली: ग्रामीण वार्डों में आज भी जल वितरण पूरी तरह बोरिंग पर निर्भर है। ओवरहेड टंकियां न होने से सबसे ज्यादा समस्या यहीं है।
- वार्ड 48 सबसे प्रभावित: नगर निगम में पेयजल को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें अकेले वार्ड क्रमांक 48 से आ रही हैं।
- सप्लाई चेन में अनियमितता: टंकियों में फिल्टर प्लांट के जरिए समय पर पानी नहीं भरा जा रहा है, जिससे सप्लाई टाइमिंग पूरी तरह बिगड़ गई है।
📞 सीएम हेल्पलाइन में आ रही हैं ऐसी शिकायतें
सीएम हेल्पलाइन (181) पर नागरिक अपनी आपबीती बताते हुए तीखे सवाल पूछ रहे हैं:
- कर वसूली पर सवाल: जब नगर निगम हर महीने ₹260 जलकर वसूल रहा है, तो फिर एक दिन छोड़कर पानी क्यों दिया जा रहा है?
- प्रेशर और समय घटाया: पहले जहाँ 45 मिनट से 1 घंटे तक पानी आता था, वहीं अब इसे घटाकर 15 से 20 मिनट कर दिया गया है। पानी का प्रेशर भी बेहद धीमा है।
- गंदे पानी की समस्या: लोग नलों में मटमैला और गंदा पानी आने की शिकायतें कर रहे हैं। साथ ही निर्धारित समय पर पानी न सप्लाई करने से दैनिक दिनचर्या प्रभावित हो रही है।

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